अलौकिक प्रेम

 

 

UFO-close-encounter-shutterstock-e1446423385313

‘विज्ञान कथा? आपका मतलब है साइंस फिक्शन?’

‘हां’ कहते ही उन्हें  दूसरी ओर से हंसने की आवाज सुनाई दी।

‘साइंस फिक्शन और बालीवुड में? मजाक तो नहीं कर रहे हैं मधुर जी?’

प्रसिद्ध निर्माता- निर्देशक मधुर माखीजा टेलीफोन पर ही मुस्कुराए और फिर बोले- ‘नहीं रजत जी, मजाक और आपसे? इस बार में कोई रिस्क नहीं लेना चाहता।’

‘रिस्क? कैसा रिस्क?’

मधुर जी संभल कर तुरंत बोले- ‘नहीं… नहीं, फिल्म में आप होंगे तो रिस्क कैसा? फिर भी मैं चाहता हूं रजत जी कि मेरी यह नई फिल्म ‘सुपर हिट’ निकले। देश के सारे सिनेमा हालों पर पब्लिक टूट पड़े। लोग एक-दो बार नहीं, बार-बार इस फिल्म को देख­…’

‘लगता है, नायाब थीम मिल गया है। लव-वब है कि नहीं?’

‘है रजत जी। बिना प्रेम के भला कोई फिल्म सुपरहिट हो सकती है?’

‘चलिए प्रेम-व्रेम का मसाला तो हम भी डाल देंगे। लेकिन कहानी का थीम क्या है?’

‘बस यों समझिए कि ऐसी थीम पर बालीवुड में अब तक कोई फिल्म नहीं बनी है…’

‘गुड्। क्या एक्स्ट्रा आर्डिनरी प्रेम है?’

मधुर जी गंभीर होकर बोले- ‘एक्स्ट्रा आर्डिनेरी नहीं, ‘एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल’ प्रेम है। हीरो पृथ्वी से और हीरोइन सितारों की दुनिया के किसी अज्ञात ग्रह से! मतलब लव स्टोरी तो रहेगी ही- उस पर विज्ञान कथा का रंग चढ़ा देंगे। साइंस फिक्शन फिल्म बन जाएगी। पब्लिक को बताएंगे- पहली बार एक अद्भुत अलौकिक प्रेम कहानी! एम. एम. प्राडक्शंन का नया धमाका!’

‘साउंड्स इंट्ररस्टिंग।’

‘तो स्टोरी सैशन कब रख लूं?’ माखीजा ने अच्छा मूड देखकर फौरन कहा- ‘आप आधा घंटे का समय कब दे सकेंगे।?’

‘मेरा शूटिंग शिड्यूल बहुत टाइट चल रहा है। तीन-तीन शिफ्टों में काम कर रहा हूं।…फिर भी, आपको तो समय देना ही है।…ऐसा कीजिए, परसों रख लीजिए रात को नौ बजे ‘सन एंड सेंड’ में। और हां, बाइ द वे, हीरोइन किस रखने का विचार है?… मैं सोनाली को प्रिफर करूंगा।’

‘आप देखते रह जाएंगे रजत जी। हीरोइन मेरी बिल्कुल नई खोज है। कहानी का सब्जैक्ट ऐसा है कि उसमें नया चेहरा होना चाहिए। और, यह नया चेहरा मैंने अखबारों में विज्ञापन देकर देश के तमाम शहरों की खाक छानने के बाद खोजा है। यह नई खोज है- मेनका। सचमुच की मेनका है- स्वर्ग की अप्सरा! बालीवुड के बड़े-बड़े विश्वामित्रों की तपस्या भंग कर देगी वह।’

‘लेकिन मधुर जी…बिल्कुल नई हीरोइन?’

‘आप बेफिक्र रहिए। ऐसी प्रतिभा और अलौकिक सौंदर्य किसी दूसरी हीरोइन में है ही नहीं। जानते हैं, इस फिल्म की कहानी का आइडिया भी मेरी इसी नई खोज ने दिया है। रजत जी, यह करोड़ों का दांव मैं यों ही नहीं लगा रहा हूं।’

मखीजा मुस्कुराए- ‘परसों स्टोरी सैशन में ले आऊंगा। फिर आपकी राय पूछूंगा।’

स्टोरी सैशन में फिलम नगरी बालीवुड के टाप स्टार और माखीजा की नई खोज मेनका के अलावा कहानीकार शैलेंद्र सुमन को रहना था। कहानी एकांत में सुनी जानी थी ताकि किसी और को उसकी भनक न पड़े। अन्यथा थीम की चोरी फिल्म नगरी में आम बात थी। घुमा-फिरा कर नई कहानी बना ली जाती। यही सब सोचकर मखीजा ने अपनी नई फिल्म की कहानी केवल चार लोगों के बीच सुनाने की व्यवस्था की थी।

हीरो रजत रात 10 बजे ‘सन एंड सेंड’ पहुंचा। कमरे में पहुंचते ही उसने कहा- ‘बस शुरू कीजिए मधुर जी। मैं साढ़े दस बजे चला जाऊंगा। दूसरा अपाइंमेंट है।’

तभी उसकी नजर मेनका पर पड़ी। न जाने उसमें कौन-सा आकर्षण था कि वह अपलक उसे देखता रह गया। उसने सम्मोहित होकर मेनका की ओर हाथ बढ़ाया और बोला, ‘मैं रजत कुमार।’

मेनका मुस्कुराई। लगा जैसे बिजलियां कौंधी। कमरे में टंगे झाड़फानूस के तमाम बल्बों की रोशनी के सितारे उसकी आंखों में झिलमिला उठे।

माखीजा ने रजत कुमार की ओर देखकर कहा- ‘मेरी नई खोज कैसी लगी?’

रजत कुमार जैसे तंद्रा से जागा। बोला- ‘अलौकिक!’

खीजा ने शैलेंद्र सुमन को कहानी सुनाने का इशारा किया।

शैलेंद्र सुमन ने संक्षेप में कहानी सुनाना शुरू किया- बलराम गांव का एक गरीब लड़का है। लोग उसे ‘बल्लू’ कहते हैं। घर में मां और एक बड़ी बहन है। बल्लू स्कूल जाता है लेकिन बाकी समय में घर के काम करता है। घर के आंगन में सोने पर कई बार आकाश में तारों को देखकर मां से पूछता है- मां, तारे क्या हैं?

…मां प्यार से उसका सिर थपथपाते हुए कहती है- जो लोग इस दुनिया से चले जाते हैं, वे तारे बन जाते हैं, मेरे बेटे।

…बल्लू पूछता है- मेरे ‘बापू’ कहां हैं उनमें?…मां कोई चमकता हुआ तारा दिखाकर कहती है- वे हैं बेटे, तेरे बापू वे रहे।…बल्लू आंखें फाड़े देखता रह जाता है उस तारे को…

‘आगे बढ़ो।’ मखीजा कहते हैं।

लेकिन रजत कुमार हाथ से रुकने का इशारा करते हुए कहता है- ‘ठीक है…सुनाओ-सुनाओ।’

बल्लू आकाश के असंख्य तारों को देखता रहता है…

‘रुकना’ रजत ने कहा- ‘यहां नोट कर लो ‘लोरी। ड्रीम सीक्वेंस।’

सुमन कहानी आगे बढ़ाता है- गांव का मुखिया बहुत धूर्त और बदमाश है। वह बल्लू की मां और बहन को बहुत तंग करता है। लेकिन कुछ शरीफ लोग उनकी सदा मदद करते हैं।…बल्लू अपनी हर कक्षा में अव्वल आता है। वह किसी दिन कुछ बनकर दिखाना चाहता है। एक ही सपना है उसका कि एक दिन वह भी एक बड़ा आदमी बनेगा। कामयाबी हासिल करेगा। तब मुखिया को सबक सिखाएगा। इस बीच मुखिया उनकी जमीन हड़पने की कोशिश करता है लेकिन सफल नहीं हो पाता। बल्लू गांव के युवक-युवतियों का ‘युवा मंगल दल’ बना लेता है और बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाता है। उनका दल गांव में नुक्कड़ नाटकों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जागृति लाने का प्रयास करते हैं।…

‘नोट करो- डांस। लोक-नृत्य’। रजत ने कहा।

…बल्लू को लगता है उसे कुछ बनने के लिए गांव से बाहर निकलना होगा। उसने सुना है बंबई बहुत बड़ा शहर है। वहां किस्मत बन सकती है।…एक दिन वह मां और बहन से विदा लेकर बंबई चला आता है।…

मेनका का सुकोमल हाथ उठा। रत्नजड़ित दो अंगूठियां झिलमिलाईं। तर्जनी ऊपरी होंठ पर टिकी। रजत ने देखा। कनखियों से माखीजा ने भी देखा। मेनका ने जम्महाई ली। चुपचाप।

माखीजा समझ गए। हीरोइन की एंट्री अब तक नहीं हुई।

सुमन सतर्क हुए। आगे सुनाने को ही थे कि रजत ने स्थिति भांप कर कहा- ‘भई, हीरोइन…’

‘सर, बस आने वाली हैं।’ शैलेंद्र सुमन ने कहा।

माखीजा हंसकर बोले- ‘जरा एंट्री’ देखिएगा आगे। कितने नाटकीय रूप से आती हैं वे!’

कहानीकार शैलेंद्र सुमन ने तेजी से पढ़ना शुरू किया।

कहानी आगे बढ़ी…बंबई में बहुत संघर्ष करता है बल्लू। तरह-तरह के काम करता है। एक स्थानीय थियेटर ग्रुप के संपर्क में आता है। नाटक का शौक तो पहले से था- अब अपनी पूरी मेहनत और प्रतिभा दिखाता है। उसके नाटकों को खूब सफलता मिलती है। एक दिन नाटक में उसका अभिनय देखकर एक फिल्म डायरेक्टर उसे अपनी फिल्म के लिए ‘साइन’ कर लेता है। बल्लू उर्फ बलराम अब एक सफल हीरो बन जाता है। हिट फिल्मों का चहेता हीरो। बाद में मां और बहन बंबई आ जाते हैं। बहन की धूमधाम से शादी हो जाती है…

‘हां, फिर क्या होता है?’ रजत कुमार ने पूछा।

….बलराम एक शूटिंग के सिलसिले में महाबलीपुरम गया है। शोर टेंपल के आसपास, समुद्र तट, ‘बाॅस रिलीफ’ उर्फ अर्जुन मोक्ष शिला और महिषासुरमर्दिनी गुफा आदि में फिल्म की शूटिंग होती है।…

‘रजत जी, मेनका जी अब जरा सिचुए्शन पर ध्यान दीजिए। हां, आगे, सुनाओ?’ माखीजा ने कहा।

…चांदनी रात है। बलराम सागर तट पर झूले में अकेला, धीरे-धीरे झूल रहा है। सागर की लहरें किनारे आ-आकर छपाक् से टकरा रही है। स्वप्निल माहौल है। तभी उसके कानों में जैसे सैकड़ों घुघुरूओं की मधुर आवाज टकराती है। वह रेतीले तट की ओर देखता है। और, देखता ही रह जाता है…उस उस अनिंद्य सुंदरी को, उस अप्सरा-सी आकर्षक युवती को। बिल्कुल दिव्य सौंदर्य की प्रतिमूर्ति! वह उसकी ओर कुछ क्षण अपलक देखती है और सहसा थिरक उठती है। किसी अप्सरा की तरह दिव्य नृत्य करने लगती है।…बलराम उसके मोहपाश में बंध जाता है। ठगा-सा, सम्मोहित होकर धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ता है। बढ़ता है और उसे अपने आगोश में ले लेता है। लगता है जैसे जन्म-जन्मांतरों  से बिछुड़ी दो आत्माओं का मिलन हुआ हो। दूर पीछे शोर टेंपल दिखाई देता है। छपाक्-छपाक्… लहरों की आवाज।

‘गुड! लेकिन वो साइंस फिक्शन?’ रजत ने मेनका के चेहरे की चमक देखकर मखीजा से पूछा।

‘बस शुरू हो गया है साइंस फिक्शन…हां, आगे सुनाना?’ मुस्कुराकर माखीजा ने कहा।

…वह अनिंद्य सुंदरी इस ‘लोक’ या ग्रह की नहीं है।

‘क्या मतलब?’ रजत ने पूछा।

‘हां रजत जी, वह ब्रह्मांड के किसी और ग्रह से आई है!’ मधुर माखीजा हंसकर बोले।

रजत और मेनका एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए।

शैलेंद्र सुमन ने कहानी आगे बढ़ाई- अप्सरा के समान सुंदर सायबा हमारे ग्रह पृथ्वी की निवासी नहीं है। किसी अज्ञात लोक से आई है वह। सुनो प्रिय…अचानक बलराम के कानों में आवाज आती है। उसे लगता है जैसे सैकड़ों सुमधुर नन्ही घंटियां टुनटुना उठी हों।…बलराम चौंकता है लेकिन तभी उसकी आंखों में झांकते हुए सायबा कहती है- मैं किसी और लोक से आई हूं प्रिय! पहले भी आती रही हूं तुम्हारे इस ग्रह का अध्ययन करने के लिए। मुझे विशेष अनुसंधान के लिए यहां भेजा गया है। मेरे अनुसंधान का विशेष है- तुम्हारी जाति में प्रेम और प्रजनन।…फिर वह बताती है कि प्रेम तो उनके लोक में भी होता है लेकिन तुम मनुष्यों की तरह के प्रजनन का तरीका वे नहीं अपनाते।

रजत और मेनका के एकसाथ जिज्ञासा से भरकर कहानी सुना रहे शैलेंद्र सुमन की ओर देखा।

…सायबा कहती है कि उसके लोक में, वहां के निवासी अपनी मर्जी से बच्चों को जन्म नहीं दे सकते। यह काम वहां की सरकार की निगरानी में ‘शिशु उत्पादन विभाग’ द्वारा किया जाता है। भविष्य के लिए जैसे नागरिकों की जरूरत होती है, वैसे बच्चे तैयार किए जाते हैं। वे बच्चे कृत्रिम गर्भाशय में तैयार होते हैं। नागरिकों के शुक्राणुओं और डिंबों की जांच करके उन्हें ‘शुक्राणु बैंकों’ और ‘डिंब बैंकों’ में जमा कर दिया जाता है। फिर आनुवंशिक गुणों की जांच करके वैज्ञानिक, इंजीनियर, कलाकार, साहित्यकार, संगीतकार, सैनिक, मजदूर आदि तैयार किए जाते हैं…फिर कहती है- यह सब मैं तुम्हें दिखाऊंगा बलराम…तुम मेरे लोक चलोगे। चलोगे ना प्रिय?…

‘बलराम क्या करता है?’ रजत ने कहानी में डूबते हुए पूछा।

…बलराम जाता है। सायबा के साथ उड़नतश्तरी जैसे अंतरिक्ष यान में वह उसके लोक, उसके ग्रह पर जाता है। लेकिन यहां…यहां बालीवुड में बलराम के अचानक गायब हो जाने के कारण हंगामा मच जाता है। तरह-तरह की अपवाहें उड़ती हैं। कई सिने अखबार और पत्रिकाएं रजत के गायब होने के तरह-तरह की मनगढ़ंत बातें  प्रकाशित करते हैं। कुछ अखबार तो किसी टाप स्टार से गुपचुप विवाह और हनीमून पर विदेश चले जाने की अपवाहें छाप देते हैं। दूसरे अखबार उन हीरोइनों के गुस्से में दिए गए उल्टे-सीधे वक्तव्य प्रकाशित कर देते हैं जिनसे बलराम की शादी की अपवाहें उड़ी थीं।

‘फिर क्या होता है?’ रजत ने पूछा।

…बलराम ज्यों ही सायबा के साथ उसके ग्रह में पहुंचता है तो उन दोनों को हिरासत में ले लिया जाता है। कड़ी जांच के बाद उनसे पूछताछ की जाती है। सायबा बलराम को उस ग्रह में लाने की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार कर लेती है।…

…वहां की अदालत में सायबा पर केस चलता है। उस पर दूसरे लोक के प्राणी से प्रेम करने और उसे बिना अनुमति के अपने लोक में ले आने का आरोप लगाया जाता है। उस लोक का एक व्यक्ति बलराम के खिलाफ लोगों को भड़काता है। उसके खिलाफ प्रदर्शन कराता है और मांग करता है कि अज्ञात ग्रह के अजनबी को मृत्युदंड देना चाहिए।

माखीजा मुस्कुराकर बोले- ‘वह व्यक्ति विलेन है। वह सायबा को पाना चाहता है, इसलिए बलराम को खत्म करवाना चाहता है। अब कहानी एक नया मोड़ लेती है।’

…सायबा की डाक्टरी जांच से पता चलता है कि वह गर्भवती है। उसके लोक में यह अक्षम्य अपराध है। वह कानून के खिलाफ बच्चे को स्वयं जन्म देने की दोषी पाई जाती है।…विलेन आपे से बाहर हो जाता है। बलराम को तत्काल दंड देने की मांग करता है। वह सायबा से मिलता है और गर्भ नष्ट करने को कहता है। उसके बाद उसे अपने साथ रहने का सुझाव देता है।…सायबा उसका प्रस्ताव ठुकरा देती है। वह सायबा और बलराम दोना­ को देख लेने की धमकी देकर चला जाता है।…

…बचाव पक्ष कहता है कि अजनबी प्राणी अन्य लोक और जाति का है। उससे सायबा गर्भधारण नहीं कर सकती। अपराध इसी लोक के किसी व्यक्ति ने किया होगा। दंड उसे मिलना चाहिए।…

… आनुवंशिक परीक्षणों से पता चलता है कि बलराम और उस लोक के प्राणियों में गुणसूत्र संख्या बराबर है। उनमें भी मनुष्यों की तरह 46 गुणसूत्र हैं। मनुष्य और उनमें आनुवंशिक समानता है। इसलिए मनुष्य और उस लोक के प्राणी आपसी संपर्क से गर्भधारण कर सकते हैं।…गहन आनुवंशिक जांच से पता चलता है कि सायबा के गर्भ में बलराम का ही शिशु पल रहा है यह पता लगते ही उस लोक में उन दोनों के प्रति घृणा और आक्रोश की लहर फैल जाती है। वहां के निवासी उनके खून के प्यासे हो जाते हैं।

‘उसके बाद?’ रजत ने पूछा।

…उसके बाद उस लोक के वैज्ञानिकों, नृतत्व्यास्त्रियों और अन्य विद्वानों का एक दल इस मामले में हस्तक्षेप करता है। उस लोक के प्राचीन ग्रंथों, पौराणिक आख्यानों, भित्ति-चित्रों आदि के आधार पर वे इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि उनके ग्रह में लाए गए अजनबी प्राणी और उस लोक के लोगों के बीच कोई रिश्ता जरूर है। उनके लोक में कई प्राचीन भित्ति-चित्रों में ऐसे दृश्य उकेरे गए हैं जिन्हें देखकर लगता है- कभी उस लोक में अंतरिक्ष से कोई प्राणी आए थे। उनके यहां आकाश से विचित्र यानों में आने वाले ‘देवताओं’ की कहानियां भी उनके प्राचीन ग्रंथों में दी गई हैं। अंत में, विद्वानों का दल इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि हो-न-हो, उनके लोक और अजनबी प्राणी के लोक के निवासियों का पूर्वज एक ही था। वहां और यहां के ‘देवता’ कोई अति बुद्धिमान प्राणी रहे होंगे जिन्होंने ब्रह्मांड के रहने लायक ग्रहों में हमारा बीज बोया होगा। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि अजनबी प्राणी और वे एक ही वंश के हैं। देवताओं के वंशज हैं ।…इसलिए अजनबी की हत्या नहीं की जानी चाहिए। उसे अपना ही वंशज मानकर क्षमा कर देना चाहिए। हमारे कानून की जानकारी न होने के कारण उससे अज्ञानता में यह अपराध हुआ है।…लेकिन, हमारे नागरिक को कानून की जानकारी थी। उससे पूछा जाना चाहिए कि उसने ‘गर्भधारण’ का अपराध क्यों किया।…

इतना सुनने के बाद अचानक माखीजा ने कहा- ‘अब देखिए अदालत का सीन बनता है। हां, आगे सुनाइए।’

सायबा भरी अदालत में अपना बयान देती है कि…उसने जो कुछ भी किया है- अपने काम और अपने लोक के हित में किया है। उसे प्रेम और प्रजनन पर अनुसंधान के लिए पृथ्वी लोक में भेजा गया था। उसने इस विषय की गूढ़तम जानकारी प्राप्त करने की हर संभव कोशिश की। इसके लिए उसने स्वयं प्रेम किया और प्रजनन की प्रक्रिया का पता लगाया।…उसने कहा- उसे यह मालूम था कि इसमें खतरा हो सकता है और स्वयं उसकी जान भी जा सकती है लेकिन अपने लोक के लिए अधिकतम प्रामाणिक जानकारी जुटाने का निश्चय करके उसने यह खतरा मोल लिया।…वह अदालत से पूछती है उसके अध्ययन की जांच करके यह बताया जाए कि क्या इस विषय पर इतनी जानकारी इससे पहले तक उसके ग्रह उसके लोक को मिल सकी थी? अदालत की उस दिन की कार्यवाही समाप्त हो जाती है।

…बलराम यह सुनकर मायूस हो जाता है। उसे लगता है, उसके साथ छल किया गया। प्रेम का नाटक करके उसे इस लोक में ले आया गया। लौटकर जेल में रात को वह एक दर्द भरा गीत गाता है। सायबा सुनती है और रोती है।

‘वह क्या­ रोती है कि  बलराम उसे गलत समझ रहा है। उसका बयान अभी पूरा नहीं हुआ है।… शैलेंद्र सुमन ने कहा।

…अगली तारीख को वह अदालत में कहती है- हर कठिन काम में खतरा होता है। उसके अध्ययन में भी खतरा था कि कहीं वह इस प्रक्रिया में स्वयं ही न उलझ जाए। वही हुआ। मनुष्यों में प्रेम का अध्ययन करते-करते वह स्वयं इस मनुष्य बलराम से प्रेम कर बैठी। स्वयं प्रेम करने के कारण ही उसका अध्ययन प्रामाणिक बन सका। प्रेम की गूढ़ अनुभूति में जाने-अनजाने ही यह सब कुछ भी हो गया। जान-बूझकर उसने यह अपराध नहीं किया।…उसे यह लगता है, बल्कि उसे इस बात का विश्वास हो गया है कि प्रेम की चरम परिणति यही है।..यह अनुभव उसके लोक के लिए बिल्कुल नया और दुर्लभ है। उसके अनुसंधान की उपलब्धि है- प्रेम से मातृत्व तक की उसकी यह अनुभव यात्रा।…अदालत में वह साफ-साफ कहती है कि उसने बलराम से प्रेम किया, उससे प्रेम करती है और जब तक जीवित है उससे प्रेम करेगी। इसके लिए वह कोई भी दंड भुगतने को तैयार है।

सायबा के मुंह से सच्चाई सुनकर बलराम की गलतफहमी दूर होती है। अपने बयान में वह कहता है कि सायबा से प्रेम उसने किया है। इसलिए अपराधी वह है। इस अपराध की सजा उसे मिलनी चाहिए।…वह अदालत से प्रार्थना करता है कि सायबा के गर्भ में जो शिशु पल रहा है, उसे जीवित रहने दिया जाए क्योंकि वह दो लोकों के मिलन का प्रतीक है। हो सकता है वह ब्रह्मांड की दो बुद्धिमान जातियों के सम्मिलित गुणों के कारण इन दोनों जातियों से अधिक बुद्धिमान हो। इसलिए उसे बचाया जाए।…वह उनकी अदालत से यह भी प्रार्थना करता है कि सायबा को दंड देने के बजाय उसके अध्ययन के लिए पुरस्कृत किया जाना चाहिए। वह कहता है कि सायबा को वह अपने लोक में ले जाना चाहता है। इसके लिए अदालत से अनुमति मांगता है।

उस लोक की अदालत फैसला करती है कि अजनबी प्राणी बलराम को तुरंत उसके लोक को वापस भेज दिया जाए। इस लोक की नागरिक को उसके साथ नहीं भेजा जा सकता। उसे इस लोक के हित में अनुसंधान करने के लिए प्रेम और प्रजनन करने के जुर्म से बरी किया जाता है लेकिन इस ग्रह के कानून को ध्यान में रखते हुए अदालत अवैध गर्भ को नष्ट करने की आज्ञा देती है।

…सायबा यह सुनकर बेहोश हो जाती है। उसकी अपील पर उसे बलराम को पृथ्वी पर भेजने से पहले एक बार मिलने की अनुमति दे दी जाती है। बलराम को दूसरे दिन पृथ्वी लोक वापस भेजने के लिए ले जाने से पहले सायबा को उसके पास लाया जाता है। सायबा उसे गले मिलती है और उसके चले जाने, सदा-सदा के लिए चले जाने के दुःख से अर्धमूर्छित-सी हो जाती है। उसे बलराम से अलग कर दिया जाता है। वह चला जाता है। रोती हुई सायबा के शब्द उसके कानों में पड़ते हैं बलराम मैं तुम्हारे बिना जीवित नहीं रहूंगी। रुको बलराम!

…लेकिन, बलराम को उसके लोक पहुंचा दिया जाता है। उसकी वापसी से अपवाहें खत्म हो जाती हैं। वह निर्माणाधीन फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त हो जाता है, लेकिन उसका मन हर समय सायबा की याद में ही खोया रहता है। उसके मस्तिष्क में उससे मिलन के क्षण कौंधते रहते हैं। उसे लगता है- उस लोक से से उसे सायबा बुला रही है…आओ! आओ बलराम, मैं तुम्हारे बिना जीवित नहीं रह सकती। मेरे पास आओ!…

‘तो बलराम क्या करता है?’ मेनका ने गंभीरतापूर्वक पूछा।

‘वह सायबा के पास जाना चाहता है- किसी भी तरह।’ माखीजा ने कहा।

‘लेकिन, वहां जा कैसे सकता है? सायबा ये वह फिर कैसे मिल सकता है?’ मेनका ने उत्सुकता से पूछा।

‘अपने लोक को छोड़कर।’

उत्तर शैलेंद्र सुमन ने दिया। फिर बोला- ‘सायबा के सपनों में खोया, उससे मिलने को आतुर बलराम एक रात ‘मैं आ रहा हूं सायबा’ कहकर नींद की काफी गोलियां खा लेता है और इस लोक से विदा ले लेता है। सोचता है, मरकर सायबा के पास पहुंच जाएगा।…सायबा से उसकी आत्मा का मिलन। एक गीत और द इंड!…

‘ओह नहीं’ अचानक मेनका ने कहा- ‘दुःखांत है यह तो।’

‘दोनों तरह के दशकों के लिए है। दुःखांत भी और आत्मा के मिलन से सुखांत भी।’ माखीजा बोले।

रजत कुमार ने कहा- ‘कहानी चलेगी। कुछ मोड़ और लाने होंगे। पटकथा में यह ध्यान रहे कि फिल्म समुद्रतट पर हीरोइन के अलौकिक नृत्य से शुरू होगी। हीरो और हीरोइन की मुलाकात होगी। उसके बाद फ्लैश बैक में हीरो के पिछले जीवन और ‘स्ट्रगल’ को दिखाना होगा। फ्लैश बैक में ही हीरोइन के जीवन की झलकियां और अनुसंधान के लिए पृथ्वी लोक में आने की घटना दिखाई जा सकती है। हीरोइन अद्भुत नर्तकी है। इसका पूरा लाभ उठाना होगा। डांस और ड्रीम सीक्वेंस बढ़ाने होंगे। विलेन का कैरेक्टर थोड़ा और उभारिए। उस लोक में ‘फाइट’ भी हो सकती है और विलेन हीरो का पीछा करते हुए पृथ्वी पर आ सकता है। यहां भी ‘फाइट सीन’ दिए जा सकते हैं। इससे हीरोइन के प्रति हीरो के अटूट प्रेम को उभारने में मदद मिलेगी।

‘और, हीरो के साथ हीरोइन को कुछ और दृश्यों में रखिए ताकि दर्शकों को को अच्छी तरह पता लग जाए कि वे दोनों ‘दो शरीर एक प्राण’ हैं। अर्जुन मोक्ष शिला और वी.जी.पी. एम्यूजमेंट पार्क की सुंदर मूर्तियों के बीच डांस के दृश्य रख सकते हैं। उनसे ‘अलौकिक’ की ‘फीलिंग’ बढ़ेगी। हीरोइन हीरो के साथ अपना लोक और अपने लोगों तक को छोड़ने के लिए तैयार है- इसे और उभारना होगा। दर्शकों को यह साफ पता लगना चाहिए कि हीरो के बिना हीरोइन जीवित नहीं रह सकती।’ यह कहकर रजत ने रहस्यमय ढंग से मुस्कुराकर मेनका की ओर देखा और काफी देर तक देखता ही रहा।

हीरो, हीरोइन और अन्य कलाकारों को साइन कर लेने के बाद फिल्म की शूटिंग के लिए जोरदार तैयारियां शुरू कर दी गईं। फिल्म के इनडोर और आउटडोर सीन ध्यान में रखकर शूटिंग शिड्यूल तैयार हो गया। और, एक दिन शुभ मुहूर्त में एक नामी स्टूडियो के भीतर ‘अलौकिक प्रेम’ का मुहूर्त संपन्न हो गया। मुहूर्त के मौके पर मौजूद बाॅलीबुड के तमाम चोटी के हीरो, हीरोइनों, निर्माता, निर्देशकों ने मधुर माखीजा की नई खोज को देखा और बाक्स आॅफिस पर लोगों की टूट पड़ती भीड़ का अनुमान लगा लिया। कई निर्माता मेनका को अपनी आगामी फिल्मों में साइन करने की मंशा भी जाहिर करना चाहते थे लेकिन माखीजा ने चालाकी से यह स्पष्ट कर दिया कि मेनका को वे ब्रेक दे रहे हैं और वह अगले पांच वर्ष तक केवल उनके साथ करने का अनुबंध भर चुकी है। दूसरे निर्माता मन मसोस कर रह गए।

फिल्म के कई महत्वपूर्ण इनडोर सीन बालीवुड के स्टूडियो में महंगे और बेहद मेहनत से तैयार किए गए सैटों में फिल्माए गए। एनीमेशन और कम्प्यूटर ग्राफिक्स का इस फिल्म में पहली बार कु्यल और भरपूर उपयोग करने का निश्चय किया गया ताकि हर दृश्य वास्तविक लगे।

कुछ माह की शूटिंग के बाद मधुर माखीजा हीरो, हीरोइन, सहयोगी कलाकारों और तकनीशियनों के साथ आउटडोर दृश्यों की शूटिंग के लिए महाबलीपुरम पहुंचे। उन्होंने बीच रिजार्ट के काटेजों में डेरा डाला और दूसरे ही दिन से आसपास शूटिंग शुरू कर दी। ‘बास रिलीफ’ की पृष्ठभूमि में मेनका ने भागीरथ की तपस्या और आका्य से पृथ्वी पर गंगावतरण का इतना भाव-प्रवण व अद्भुत नृत्य किया कि दर्शक ही नहीं शूटिंग टीम के सदस्य भी नृत्य में खो गए। मेनका के नृत्य समाप्त कर देने के बाद माखीजा की ‘कट’ की आवाज सुनाई दी।

उस दिन पूर्णिमा थी।

दिनभर की शूटिंग  से थके-मादे कलाकार और तकनीशियन अपने काटेजों में आते ही नींद के आगोश में सो गए। मधुर माखीजा भी अगले दिन का शिड्यूल तय करके सभी लोगों को आवश्यक हिदायतें देकर सोने चले गए।

रजत कुमार को नींद आ रही थी। काटेज के पीछे कैजुराइना के लंबे पेड़ों के पार सागर ठाठ­ मार रहा था। सन्नाटे में रह-रहकर सागर की लहरें किनारों पर थपेड़े मार रही थीं- छपाक्…छपाक्…

शेष कुछ नहीं। कोई आवाज नहीं। वह भावुक हो उठा। दिनभर मेनका के साथ शूटिंग में वह जैसे खोया रहता। ऐसा अनुभव उसे पहली बार इस बिल्कुल नई ‘टेलेंट’ के साथ ही हो रहा था। लेकिन रात को विश्राम के लिए अपनी काटेज में चले जाने के बाद उसे एक अजीब-सी बैचेनी होने लगती। वह मेनका के बारे में ही सोचने लग जाता। उसके प्रति एक अदृश्य-सा खिंचाव महसूस करता।

वह काफी देर तक काटेज की खिड़की से सागर तट की ओर देखता रहा। कैजुराइना के पेड़ों से छन-छनकर चांदनी रेत पर पड़ रही थी। तभी लहरें फिर टकराईं- छपाक् रजत से रहा नहीं गया। वह मंत्रमुग्ध-सा काटेज से निकला और पेड़ों के पास आकर झूले में बैठ गया। धीरे-धीरे झूलते हुए वह तट पर टकराती लहरों और दूर तक फैले सागर को देखता रहा। आकाश में चांद चमक रहा था और तट की सीध में दूर आगे चांदनी में नहाया शोर टेंपल दिखाई दे रहा था। स्वप्निल माहौल था।

उसे सहसा फिल्म की कहानी याद हो आई। सायबा और बलराम की वह सागर तट पर हुई पहली भेंट याद हो आई। सायबा और बलराम का वह अलौकिक प्रेम! वह आंख मूंद कर, लहरों के संगीत को सुनते हुए उस दृश्य की कल्पना करने लगता है। कल इस रेतीले तट पर उसी दृश्य की शूटिंग होगी।

तभी…तभी उसके कानों में जैसे सैकड़ों घुंघरुओं की मधुर आवाज टकराई। उसने रेतीले तट की ओर देखा और देखता ही रह गया।…उस अनिंद्य सुंदरी को, उस अप्सरा-सी आकर्षक युवती को। बिल्कुल दिव्य सौंदर्य की प्रतिमूर्ति! वह उसकी ओर कुछ क्षण अपलक देखती रही और सहसा थिरक उठी। किसी अप्सरा की तरह दिव्य नृत्य करने लगी…रजत उसके मोहपाश में बंध गया। ठगा-सा, सम्मोहित होकर धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा और उसे अपने आगोश में ले लिया…बोला- मेनका!

उसके कानों में मधुर घंटियां-सी टुनटुनाईं- नहीं, सायबा! मैं मेनका नहीं सायबा हूं रजत। तुम्हारे इस लोक की नहीं, ब्रह्मांड के किसी और लोक की। सुनो प्रिय, मैं पहले भी आती रही हूं तुम्हारे इस ग्रह के अध्ययन के लिए। प्रेम और प्रजनन के गूढ़ रहस्यों का पता लगाने के लिए। वहां हम अपनी मर्जी से बच्चों को जन्म नहीं दे सकते। सरकार की निगरानी में जरूरत के मुताबित बच्चे तैयार किए जाते हैं। यह सब मैं तुम्हें दिखाऊंगी रजत…तुम मेरे लोक चलोगे। चलोगे ना प्रिय?…

बातों में खोए हुए वे धीरे-धीरे तट पर काफी दूर निकल गए। रजत ने देखा, दूधिया चांदनी में सामने उड़नतश्तरी की तरह कर कोई चीज खड़ी थी। मेनका…नहीं सायबा उसे साथ लेकर उसके पास गई। पास जाकर लगा वह शायद कोई अंतरिक्षयान है- ब्रह्मांड के किसी अन्य लोक का अंतरिक्षयान। वह सायबा के प्रेम में खोया, सम्मोहित-सा उसके साथ अंतरिक्षयान में बैठा। चांदनी में नहाया अंतरिक्षयान बिना आवाज, सहसा ऊपर उठा और पलक झपकते आकाश में गायब हो गया।

दूसरे दिन हीरो-हीरोइन दोनों को गायब पाकर मधुर माखीजा ने सिर पीट लिया। शिड्यूल के मुताबिक उस दिन सागर तट पर हीरोइन के दिव्य नृत्य की शूटिंग होनी थी। वह हीरोइन के साथ हीरो की प्रथम मुलाकात का दृश्य था। फिल्म का ओपनिंग सीन ही वही था। लेकिन, रजत और मेनका तो गायब थे। कोई सूचना तक नहीं थी। एक दिन, दो दिन, चार दिन…सप्ताह हो गया। लाखों रुपए का नुकसान हो रहा था। हीरो-हीरोइन का इस तरह गायब होना कोइ नई बात तो नहीं थी लेकिन वे दो-चार दिन में लौट आते थे। अपने बारे में सूचना दे देते थे। लेकिन, रजत और मेनका ने न कोई सूचना दी। न लौटे। अंत में माखीजा ने पैकअप किया और पूरी टीम को बालीवुड वापस भेज दिया। स्वयं मद्रास की एक प्रसिद्ध कंप्यूटर साफ्टवेयर कंपनी से रजत और मेनका की कंप्यूटर पर ‘इमेजिंग’ करके फिल्म पूरी करने के बारे में बात करने चला गया। फिल्म तो आखिर पूरी करनी ही थी!

  •  (देवेंद्र मेवाड़ी )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *