अलविदा नील आर्मस्ट्रांग

 

नील आर्मस्ट्रांग
नील आर्मस्ट्रांग

मानव जाति के इतिहास में पहली बार पृथ्वी से परे किसी और खगोलीय पिंड पर चरण रखने और चंद्र विजय की पताका फहराने वाले साहसी मानव नील आर्मस्ट्रांग कल (25 अगस्त ) हमारे पृथ्वी ग्रह से विदा हो गए हैं। वे 82 वर्ष के थे।

नील आर्मस्ट्रांग ने 16 जुलाई 1969 को साथी अंतरिक्ष यात्री एडविन ‘बज़ ’ एल्ड्रिन और माइकेल कोलिंस के साथ अपोलो -11 अंतरिक्ष यान में चांद पर उतरने के लिए उड़ान भरी थी। चांद की कक्षा में पहुंचकर माइकेल कोलिंस चांद की सतह से 97 से 121 किलोमीटर की ऊंचाई पर कमांड माड्यूल का संचालन करते रहे और आर्मस्ट्रांग चंद्र माड्यूल ‘ईगल’ में ‘बज़’ एल्ड्रिन के साथ सफलतापूर्वक ‘सी आफ ट्रैंक्विलिटी’ के चौरस मैदान में उतरे। उन्होंने पृथ्वी पर इस अभियान के नियंत्रण कक्ष को संदेश भेजा, “ह्यूस्टन हम यहां ट्रैंक्विलिटी बेस में हैं। ईगल उतर चुका है।“

साढ़े छह घंटे बाद नील आर्मस्ट्रांग धीरे-धीरे चंद्र माड्यूल से बाहर निकले और उन्होंने चांद की जमीन पर पहला चरण रखते हुए वे ऐतिहासिक शब्द कहे, “मानव के लिए यह एक छोटा-सा कदम लेकिन मानवता के लिए एक लंबी छलांग है।“ उनके बाद एल्ड्रिन उतरे। उन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की सतह पर 2.5 घंटे का समय बिताया। इस दौरान उन्होंने वहां वैज्ञानिक उपकरण रखे, तस्वीरें खींची, चंद्र विजय का ध्वज फहराया और चांद की मिट्टी तथा चट्टानों के 21.7 किलोग्राम नमूने लेकर चंद्र माड्यूल में लौटे। बारह घंटे बाद उन्होंने चंद्र माड्यूल के थ्रस्टर राकेट दागकर उसे  कमांड माड्यूल से जुड़ने के लिए रवाना किया और उससे जा मिले। 24 जुलाई 1969 को वे तीनों अंतरिक्ष यात्री चांद की विजय यात्रा के बाद सकुशल धरती पर लौट आए।

नील आर्मस्ट्रांग का जन्म 5 अगस्त 1930 को अमेरिका के ओहायो राज्य में वापाकोनेटा में हुआ था। सोलह वर्ष की उम्र में ही वे लाइसेंसधारी पायलेट और अगले वर्ष नेवल एयर कैडेट बन गए। वे 1962 में अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े और 16 मार्च 1966 को उन्होंने कमांड पायलेट के रूप में डेविड आर. स्काट के संग जेमिनी-8 अंतरिक्षयान की मानवरहित अगेना राकेट के साथ जोखिम भरी डाकिंग की लेकिन एक राकेट थ्रस्टर में खराबी आ जाने के कारण तत्काल एगेना से अलग होकर तुरंत जैमिनी-8 यान का नियंत्रण संभाला और कैप्स्यूल में प्रशांत महासागर में सकुशल उतर गए। उन्हें 18 घंटे क्वारेंटाइन में रखा गया ताकि उनके साथ किसी भी प्रकार के कोई हानिकारक सूक्ष्मजीव पृथ्वी पर न पहुंच सकें।

नील आर्मस्ट्रांग 1971 तक अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन (नासा) में रहे। उसके बाद उन्होंने 8 वर्ष तक यूनिवर्सिटी आफ सिनसिनाटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पद पर कार्य किया। वे अनेक कंपनियों में अध्यक्ष और निदेशक भी रहे।

चंद्र विजय का इतिहास रखने वाले इस महान अंतरिक्ष यात्री का नाम मानवता के इतिहास में सदैव सर्वाक्षरों में लिखा जाएगा। उस महान अंतरिक्ष यात्री को विनम्र श्रंद्धाजलि।

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