काक कथा- 2

काक दम्पति
काक दम्पति

काक दम्पति को देख कर मुझे सत्यजित रे की ‘कोर्वस’ कहानी एक बार फिर याद आ गई है। पहली बार शायद 1970 के दशक में ‘यूथ टाइम्स’ के साइंस फिक्शन विशेषांक में पढ़ी थी। बीच में फिर पढ़ी दो-एक बार और अब कहानी की याद ताजा करने के लिए एक बार फिर पढ़ ली है।

‘कोर्वस’ यानी कव्वे की बड़ी मजेदार कहानी है । वह पक्षी-विज्ञानी प्रोफेसर ‘शोंकू’ की प्रयोगशाला  का कौवा है जिस पर वे बुद्धि बढ़ाने का प्रयोग कर रहे हैं। लैटिन भाषा में कौवा ‘कोर्वस’ कहलाता है। इसलिए उन्होंने अपने इस प्रिय कौवे का नाम ‘कोर्वस’ रख दिया है। एक दिन उन्होंने इसे चोंच में पेंसिल पकड़ मेज पर निशान बनाने की चेष्टा करते हुए देख लिया था और तभी इस पर अपनी ओर्निथान मशीन से बुद्धि बढ़ाने का प्रयोग करने का निश्चय कर लिया। उसे ‘कोर्वस’ कह कर बुलाने लगे। वह सुन कर सिर हिला देता। लेकिन, एक दिन कोर्वस कहने पर ‘कांव’ के बजाए बोला  ‘की?’ यानी ‘क्या?’

इसी बीच प्रोफेसर शोंकू को सेंटियागो, चिली में होने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय पक्षी सम्मेलन का आमंत्रण मिला। उन्होंने कोर्वस को अंग्रेजी में सिखाना शुरू कर दिया। एक दिन उसने चोंच में पेंसिल पकड़ कर अपना नाम लिख दिया- सी-ओ-आर-वी-यू-एस! फिर तो प्रोफेसर शोंकू के नाम के साथ ही शहरों, महीनों और दिनों के नाम और तारीखें भी लिखने लगा। टोस्ट पर चोंच से जेली लगा कर खाने लगा। अन्य कौवों से थोड़ा दूर भी रहने लगा। कई पक्षी छोटी-मोटी चीजें सीख लेते हैं लेकिन कोर्वस तो गणित, इतिहास, भूगोल और प्राकृतिक विज्ञानों से संबंधित सवालों तक के जवाब देने लगा।

कोर्वस में मानवीय बुद्धि की तक झलक दिखाई देने लगी। प्रोफेसर शोंकू ने सेंटियागो जाने के लिए सूटकेस पैक किया तो कोर्वस चोंच से चाबी उठा लाया। जाते समय मेज की दराज पर चोंच मारने लगा। दराज खोली तो देखा, पासपोर्ट वहीं छूट गया था। सेंटियागो में प्रोफेसर शोंकू का व्याख्यान शानदार रहा। उसके बाद कोर्वस ने अपने बुद्धि प्रदर्शन से प्रतिनिधियों को हैरान कर दिया। उसकी खबर और फोटो अखबार के मुखपृष्ठ पर छपी। शाम को चिली के मशहूर जादूगर सेनोर आर्गस का जादू प्रदर्शन था जिसमें आर्गस की प्रशिक्षित कई चिड़ियां भी थीं।

 लेकिन, आर्गस तो कोर्वस की बुद्धि के जादू से मोहित हो गया था। वह प्रोफेसर शोंकू से ऊंची कीमत पर कोर्वस को खरीदना चाहता है लेकिन वे मना कर देते हैं। इसके बाद वह कोर्वस को होटल के कमरे से चुरा लेता है। किसी तरह पुलिस की मदद से 80 किलोमीटर दूर जाकर पकड़ा जाता है। वह निशाना चूक कर रिवाल्वर से यहां-वहां फायर करता है तो पता लगता है उसका माइनस बीस पावर का चश्मा गायब है। तभी कोर्वस पास के पेड़ की चोटी से उड़ कर पुलिस की कार की छत पर आता है और चोंच में पकड़ा आर्गस का सुनहरे फ्रेम का चश्मा वहां रख देता है!

 ..तो, यह थी कोर्वस की कहानी। यहां मैं हर रोज सिल्वर ओक के पेड़ पर बने घोंसले में काक दंपति का बुद्धि-कौशल देख रहा हूं। देखता हूं, नीड़ का निर्माण पूरा हो जाने के बाद आगे क्या होता है। उन पर लगातार नजर रखूंगा…

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