मंजिल की ओर मंगलयान- देवेंद्र मेवाड़ी

10665931_10202557550371520_3774093806735695726_n

वह रोमांचक घड़ी बस आने ही वाली है, जब हमारा मंगलयान 24 सितंबर को मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिकों का कहना है कि 15 सितंबर को मंगलयान अपनी लगभग 98 प्रतिशत यात्रा पूरी करके आगे बढ़ चुका है। उस दिन वह पृथ्वी से लगभग 20 करोड़ 10 लाख किलोमीटर और सूर्य की कक्षा का 65 करोड़ 30 लाख किलोमीटर लंबा सफर तय कर चुका था। बुधवार, 24 सितंबर को मंगलयान सुबह 7.30 बजे मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करेगा। तब वह मंगल ग्रह की सतह से केवल 423 किलोमीटर ऊपर और पृथ्वी से लगभग 21 करोड़ 50 लाख किलोमीटर दूर होगा। इस प्रयास में सफलता का सेहरा बंध जाने पर भारत विश्व का ऐसा चौथा देश बन जाएगा जिसने मंगल अभियान में सफलता प्राप्त कर ली है। अब तक केवल अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी, नासा; रूसी फेडरल अंतरिक्ष एजेंसी (आर एफ एस ए) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ई एस ए) ही इस अभियान में सफल हुए हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वह चैथी अंतरिक्ष एजेंसी होगी, जिसने महत्वाकांक्षी मंगल अभियान को सफलता के शिखर तक पहुंचाया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज 22 सितंबर को मंगल अभियान से जुड़े वैज्ञानिकों ने मंगलयान की ट्राजेक्टरी यानी उसके प्रक्षेप-पथ में हल्का संशोधन किया। इसके लिए उन्होंने दोपहर बाद 2.30 बजे लिक्विड एपोजी मोटर (लैम) को मात्र 4 सेकेंड के लिए दागा। धरती पर वैज्ञानिकों को इस काम में सफलता की खबर 740 सेकेंड बाद मिली क्योंकि यह संदेश 22 करोड़ किलोमीटर दूर से आया। मंगलयान अब मंगल ग्रह के गुरूत्वाकर्षण की ज़द में पहुंच चुका है। हालांकि, 14 सितंबर को भी संशोधन किया जाना था, लेकिन मंगलयान अपनी राह पर ठीक-ठाक चला जा रहा था इसलिए उस दिन संशोधन नहीं किया गया। इस कारण वैज्ञानिकों ने 852 किलोग्राम तरल ईंधन की बचत की। मंगलयान के नियंत्रण केन्द्र में अंतरिक्ष वैज्ञानिक मंगलयान के लिए कमांड लोड करके उनकी पूरी तरह जांच कर चुके हैं। इससे पूर्व 11 दिसंबर 2013 और 11 जून 2014 को इस यान के प्रक्षेप-पथ में संशोधन किया गया था। लेकिन, यान को पूर्व निर्धारित पथ पर सुचारू रूप से जाता हुआ देख कर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अप्रैल और अगस्त माह में कोई संशोधन नहीं किया।

मंगलयान का मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करना तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। इसके लिए 24 सितंबर को प्रातःकाल 4 बज कर 17 मिनट पर पहले यान के तीनों ऐंटेनाओं को सक्रिय कर दिया जाएगा ताकि पृथ्वी और मंगलयान के बीच सिगनल सही तरह से ट्रांसमिट हो सकें। प्रातः 6 बज कर 56 मिनट पर मंगलयान को मंगल ग्रह की ओर घुमा दिया जाएगा। इसके 5 मिनट बाद उसके इंजन के नीचे लगे ‘थ्रस्टर’ मंगलयान को सही ऊंचाई बनाए रखने में मदद करेंगे। मंगलयान का लिक्विड इंजन ठीक 7 बज कर 17 मिनट पर दगेगा, 7 बज कर 21 मिनट पर मंगल ग्रह आकल्ट शुरू होगा और 7 बज कर 22 मिनट से मंगलयान से पृथ्वी पर रेडियो सिगनल आने बंद हो जाएंगे। मंगलयान के मंगलग्रह की कक्षा में प्रवेश कर जाने का पता भारतीय डीप स्पेस, नेटवर्क से लगेगा। भारत में बंगलुरु से 40 किलोमीटर दूर ब्यालालु स्थित डीप स्पेस नेटवर्क केन्द्र; नासा के अर्थ स्टेशन, गोल्डस्टोन और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अर्थ स्टेशन, मैड्रिड से 24 मिनट बाद यानी प्रातः 7 बज कर 54 मिनट पर इस बात की पुष्टि हो सकेगी कि मंगलयान मंगलग्रह की कक्षा में प्रवेश कर गया है। एक बार मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हो जाने के बाद मंगलयान मंगलग्रह से 423 किलोमीटर की निकटतम और 80,000 किलोमीटर की अधिकतम दूरी पर अंडाकार पथ में उसकी परिक्रमा करता रहेगा। मंगलयान में 5 वैज्ञानिक उपकरण रखे गए हैं जो मंगल ग्रह का अध्ययन करेंगे। भारत ने 450 करोड़ रू. लागत के महत्वाकांक्षी मंगल अभियान के तहत 5 नवंबर 2013 को श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केन्द्र से मंगलयान को मंगलग्रह की ओर रवाना किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *