न्यूमोनिया पर एक नजर

5 दिसंबर 2010

न्यूमोनिया पर एक नजर

यह जान कर हैरान हूं कि आज भी दुनिया भर में न्यूमोनिया से कई साल करीब 30 लाख लोग पीड़ित होते हैं। यह फेफड़े का रोग हैं इसका संक्रमण हो जाने पर फेफड़े के सूक्ष्म वायुकोषों में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ भर जाता है। यह रोग जीवाणु (बैक्टीरिया), विषाणु (वायरस), फफूंदी, परजीवियों या कई अन्य कारणों से फैल सकता है। जीवाणुओं से न्यूमोनिया होने पर एंटिबायोटिक दवाइयों से इलाज थोड़ा जल्दी किया जा सकता है। फेफड़े के ऐक्स-रे और बलगम की जांच करके रोग का पता लगाया जा सकता है।

न्यूमोनिया तीव्र और चिरकालिक दो प्रकार का हो सकता है। तीव्र न्यूमोनिया प्रायः स्टेप्टोकोकस न्यूमोनी, माइकोप्लाज्मा न्यूमोनी और क्लेमाइडिया न्यूमोनी आदि जीवाणुओं से होता है।

इस रोग के लक्षण वही हैं जो मैंने पत्नी में देखेः न्यून रक्तदाब, श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में भारी वृद्धि, तेज बुखार, खांसी, बलगम, गले-छाती में घरघराहट की आवाज, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द, पेशियों में दर्द, कभी-कभी काफी पसीना आना, चमड़ी में कुछ जगह नीलापन, उबकाई, उल्टी, टूटन, थकान, कमजोरी, शरीर का संतुलन न बन पाने के कारण धक्के लगना, आदि। डाक्टर फेफड़े के ऐक्स-रे में अपारदर्शिता देख कर न्यूमोनिया के प्रकोप को पहचान लेते हैं। डज्ञॅ. कटारिया ने भी ऐक्स-रे में दाएं फेफड़े के निचले हिस्से की अपारदर्शिता देख कर न्यूमानिया का प्रकोप बताया था। फेफड़ों के रोगग्रस्त हो जाने के कारण एंटी-डाइयूरेटिक हार्मोन अधिक बनने लगता है जिसके कारण रोगी के खून में सोडियम की भी कमी हो जाती है। न्यूमोनिया के इलाज के लिए असरदार एंटिबायोटिक दवाइयां उपलब्ध हैं। इन दवाइयों से 2 से 4 सप्ताह के भीतर इस रोग का उपचार किया जा सकता है। विषाणुओं से न्यूमोनिया होने पर उपचार में अधिक समय लगता है।

इस रोग के लक्षणों के बारे में चिकित्सा विज्ञान के जनक, महान यूनानी चिकित्सक थियोफ्रेस्टस ने 460-320 ई.पू. में लिखा था। यानी, न्यूमोनिया का प्रकोप हजारों साल से हो रहा है।

बहरहाल, इलाज के बाद अब लक्ष्मी डाक्टर की हिदायतों का पालन करते हुए स्वास्थ्य लाभ के लिए आराम कर रही हैं। फिलहाल बेटी और मैंने उनकी जिम्मेदारियां बांट ली हैं।

 

 

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