डोरिस लेसिंग

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विज्ञान कथाकार भी थीं डोरिस लेसिंग। इसी माह 17 नवंबर 2013 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित उपन्यासकार डोरिस लेसिंग पाठकों को अपने 50 से अधिक उपन्यासों की साहित्यिक विरासत सौंप कर इस दुनिया से विदा हो गईं। इन उपन्यासों में उनके विज्ञान कथा शैली में लिखे उपन्यास भी शामिल हैं। कथा कहने के लिए उन्होंने विज्ञान कथा के औजारों का उपयोग क्यों जरूरी समझा होगा, इस बात को समझना शायद जरूरी है।

असल में, वर्ष 2007 के साहित्य नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखिका डोरिस लेसिंग और मुख्य धारा के उनके अनेक समकालीन प्रतिष्ठित लेखकों में एक बड़ा अंतर यह है कि उन्होंने न केवल विज्ञान-कथा विधा में साहित्य का सृजन किया बल्कि उन्होंने बेझिझक होकर गर्व के साथ स्वीकार किया कि वे विज्ञान-कथाएं लिखती हैं। 1970 तथा 1980 के दशक में जब 26 से भी अधिक उपन्यास और कथा संग्रह प्रकाशित होने के बाद उन्होंने इस विधा में ‘द मेमोयर्स आफ अ सर्वाइवर’ (1974) उपन्यास लिखा तो मुख्य धारा से इतर क्षेत्र में जाकर लिखने के लिए उनकी आलोचना की गई। लेकिन, उसके बाद उन्होंने विज्ञान कथा शैली को अपना कर ‘कैनोपस इन अर्गोः आर्काइव्स’ शीर्षक के अंतर्गत पांच उपन्यासों की पूरी श्रंखला लिख डाली। श्रंखला का चौथा उपन्यास ‘द मेकिंग आफ द रिप्रेजेंटेटिव फार प्लेनेट 8’ प्रकाशित होने के बाद जान लियोनार्ड ने ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में यह टिप्पणी कीः ‘उन तमाम पापों में से इस पाप के लिए भी बीसवीं सदी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा कि इसने लेसिंग को हतोत्साहित किया…..अब वे अबूझ ब्रह्मांड में हमारे नगण्य अस्तित्व का प्रचार कर रही हैं।’

लेसिंग ने इसका दो टूक जवाब दिया, “वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि विज्ञान कथाओं में हमारे समय का उत्कृष्ट सामाजिक साहित्य भी मौजूद है। मैं ग्रेग बियर के ‘ब्लड म्यूजिक’ जैसे क्लासिक विज्ञान-कथा साहित्य की प्रशंसक हूं। वे महान लेखक हैं।” स्वयं से उम्र में 32 वर्ष छोटे, विज्ञान कथाकार ग्रेग बियर के प्रति उनका यह आदर विज्ञान कथा साहित्य का सम्मान है और यह विज्ञान कथा विधा के प्रति उनके गहरे लगाव को भी स्पष्ट करता है। प्रसंगवश ग्रेग बियर भी सातवे तथा आठवे दशक में लेसिंग की तरह ही समर्पित भाव से विज्ञान कथाएं लिख रहे थे। इस दौरान उनकी विज्ञान कथाओं की पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित हुईं। डोरिस लेसिंग ने 1985 में प्रकाशित जिस ‘ब्लड म्यूजिक’ नामक उपन्यास का उल्लेख किया है, वह नैनोटैक्नोलाजी की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है जिसमें डीएनए को मशीनों का हिस्सा बना दिया जाता है।

असल में 60 से भी अधिक पुस्तकों की लेखिका डोरिस लेसिंग ने अपने विगत 58 वर्ष के रचना काल में लेखन की विविध शैलियां अपनाईं और दो दशकों के दौरान विज्ञान कथा साहित्य की रचना करके उन्होंने अपनी स्पष्ट पहचान ही नहीं बनाई बल्कि उन विज्ञान कथाओं में किसी और दुनिया और भावी समाज के स्वरूपों की परिकल्पना करके प्रकारांतर से हमारी इसी दुनिया और समाज की गहरी पड़ताल की। बल्कि, यों कहना चाहिए कि उन्होंने विज्ञान कथा विधा का दूरबीन और खुर्दबीन दोनों की ही तरह इस्तेमाल करके हमारी दुनिया और समाज के निकट तथा सुदूर भविष्य पर अपनी पैनी निगाह डाली।

22 अक्टूबर 1919 को फारस (अब ईरान) के करमेंशाह नामक स्थान में जन्मी डोरिस लेसिंग की शिक्षा-दीक्षा दक्षिणी रोडेशिया (अब जिम्बाब्बे) में हुई। पिता अल्फ्रेड कुक टेलर प्रथम विश्व युद्ध में ब्रितानी फौज में कैप्टन और बाद में बैंक अधिकारी रहे। मां एमिली माड टेलर नर्स थीं। पिता ने दक्षिणी रोडेशिया के एक दूर-दराज ग्रामीण इलाके में मक्का का फार्म खरीदा जो अन्य स्थानों से लगभग कटा हुआ था। डोरिस का बचपन उसी एकांत में बीता। 14 वर्ष की उम्र में उसने अपनी औपचारिक पढ़ाई से मुक्ति पा ली और उसके बाद कई तरह के काम किए। वह आया रही और टेलीफोन आपरेटर, कार्यालय सहायक, स्टेनोग्राफर तथा पत्रकार के रूप में काम किया। इस बीच उनकी कई कहानियां प्रकाशित हुईं। डोरिस ने बीस वर्ष की उम्र में फ्रैंक चार्ल्स विस्डम से विवाह किया। उनके दो बच्चे, जान और जीन पैदा हुए। 1943 में उन्होंने तलाक ले लिया। 1945 में उन्होंने माक्र्सवादी ग्रुप के जर्मन-यहूदी प्रवासी गाटफ्रीड लेसिंग से विवाह कर लिया। इस विवाह से पीटर नामक पुत्र का जन्म हुआ। 1949 में पुनः तलाक लेकर वे अपने पुत्र और ‘द ग्रास इज सिंगिंग’ उपन्यास की पांडुलिपि के साथ लंदन चली गईं। तब से उनकी आजीविका का साधन केवल लेखन ही रहा। ‘द ग्रास इज सिंगिंग’ उनका पहला उपन्यास था जो 1950 में छपा। वे कुछ वर्षों तक ब्रिटिश कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य भी रहीं और परमाणु अस्त्रों विरोधी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

अपने प्रथम उपन्यास ‘द ग्रास इज सिंगिंग’ में लेसिंग ने एक कमजोर श्वेत किसान की पत्नी और अश्वेत नौकर के आपसी संबंधों के ताने-बाने में प्रेम, घृणा, नस्लीय दूरी और संबंधों की टकराहट को उजागर किया। उसके बाद की रचनाओं में ‘चिल्ड्रन आफ वायलेंस’ श्रंखला के पांच उपन्यास- ‘मार्था क्वेस्ट’, ‘अ प्रापर मैरेज’, ‘अ रिपिल फ्राम द स्टार्म’, ‘लैंडलाक्ड’ तथा ‘द फोर-गेटेड सिटी’ प्रमुख हैं। इस श्रंखला को इन उपन्यासों के प्रमुख पात्र ‘मार्था क्वेस्ट’ के नाम पर ‘मार्था क्वेस्ट सीरीज’ भी कहा जाता है। श्रंखला का अंतिम उपन्यास ‘द फोर-गेटेड सिटी’ महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। 1962 में ‘द गोल्डन नोटबुक’ के प्रकाशन ने उन्हें एक बेहद संवेदनशील लेखिका के रूप में स्थापित कर दिया। नारीवादी आंदोलन के समर्थकों ने इसे एक ऐसे अद्वितीय उपन्यास का दर्जा दिया जिसमें बीसवीं सदी के पुरूष तथा नारी संबंधों का अत्यंत गंभीरता के साथ चित्रण किया गया है। लेकिन, लेसिंग अपने-आप पर नारीवादी लेखिका का ठप्पा नहीं लगवाना चाहती थीं। ‘द न्यूयार्क टाइम्स’ के 25 जुलाई 1982 अंक में उन्होंने कहा, ‘नारीवाद समर्थक चाहते हैं कि मैं कहूं, ‘अरे बहिनो, उस स्वर्णिम सुबह को पाने के लिए मैं तुम्हारे संघर्ष में साथ खड़ी हूं जिसमें पशुरूपी पुरूषों का नामोनिशां भी नहीं होगा। वे चाहती हैं कि पुरूषों और महिलाओं के बारे में लोग ऐसी ही सपाट बयानबाजी करें? सच, वे यही चाहती हैं। मुझे खेद है, मगर मैं तो इसी नतीजे पर पहुंची हूं।’

यानी, लेसिंग नारी-पुरूष संबंधों को सीमित दायरे में देखने के बजाय उन्हें संपूर्ण समाज के परिपे्रक्ष में देखना चाहती थीं। और, समाज में तमाम अंतसंबंधों का बहुत बारीक जाल फैला हुआ है जिसके सहारे पर मानव सभ्यता का क्रमिक विकास होता है। समाज में संबंधों की इसी बुनावट की पड़ताल के लिए लेसिंग ने विभिन्न सामाजिक स्वरूपों की परिकल्पना की। इसके लिए उन्होंने फंतासी और विज्ञान-कथा विधा का सहारा लिया। इन सामाजिक स्वरूपों को संभव बनाने के लिए उन्होंने आकाशगंगा में अंतरग्रहीय साम्राज्य की कल्पना की। उसमें परिस्थितिजन्य विकास क्रम के विविध रूपों की रचना करके उन सामाजिक स्थितियों से हमें रू-ब-रू कराया। इसके साथ ही हमें, हमारी इसी दुनिया का ‘कल’ का चेहरा दिखाने के लिए उन्होंने पृथ्वी पर नष्ट हो रहे अनियंत्रित समाज की एक प्रतिनिधि वृद्ध महिला के संस्मरणों की शैली का भी सहारा लिया। वर्तमान समय और निकट तथा सुदूर भविष्य की इन्हीं तस्वीरों को साफ-साफ सामने रखने के लिए उन्होंने फंतासी व विज्ञान कथा विधा अपनाई और रूपक कथाएं बुनीं। यह इसलिए भी जरूरी था कि वे इन उपकरणों से उपनिवेशवाद, परमाणु युद्ध, पारिस्थितिकीय विपदाओं और पुरूष व नारी संबंधों की वर्तमान तथा संभाव्य स्थिति की पड़ताल कर सकती थीं। इसीलिए उन्होंने किसी और दुनिया के बहाने हमारी इसी दुनिया और समाज पर अपनी पैनी निगाह डाली।

उन्होंने 1970 तथा 80 के दशक में विज्ञान कथा तथा फैंटेसी को इन नए कथा उपकरणों के रूप में अपना कर हमारी इस दुनिया के ह्रासोन्मुख समाज तथा विना्य्यील पर्यावरण की पृष्ठभूमि पर 1974 में अपना पहला उपन्यास ‘द मेमोयर्स आफ अ सर्वाइवर’ लिखा। कहानी में समाज की कानून व्यवस्था बरबाद हो गई है, प्रदूषण से जीना मुहाल हो चुका है और मानव सभ्यता विनाश की ओर बढ़ रही है। उपन्यास का मुख्य पात्र है एक वृद्ध महिला, जो अपने कमरे की खिड़की से सब कुछ समाप्त होते देख रही है। बच्चे, युवक-युवतियां और बूढ़े सभी उसी विनाशशील दुनिया में जीने के लिए संघर्ष  कर रहे हैं। लेसिंग का मानना था कि देखते रहिए, चारों ओर बर्बरता का राज होगा और हम सब जीने के लिए संघर्ष कर रहे होंगे। लोग अपना घरबार छोड़ कर जा रहे हैं और जिन गलियों में कभी वे रहते थे वहां झाड़ उग रहे हैं, जानवर घूम रहे हैं। वृद्धा की स्मृति में बीता हुआ और वर्तमान समय कौंध रहा है। लेकिन, क्या कहीं आशा की कोई किरण दिखाई देती है? हां, एक अजनबी आया था, जो एमिली नामक एक अनाथ बच्ची को वृद्धा के पास यह कह कर छोड़ गया है कि, “इसकी देखभाल करना, अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है।” कमरे में सामान्य समय घुलता जा रहा है…(हमें सिल्वेडोर डाली की पिघलती हुई घडि़यां याद आ सकती हैं।)…और उस वृद्धा की आंखों में बचपन की शुरूआत से आज तक के तमाम दृश्य कौंध रहे हैं। उपन्यास निकट भविष्य की संभाव्यता को एक मायावी घटनाक्रम के रूप में सामने रखता है।

लेसिंग ने विज्ञान कथा के उपकरणों से ‘कैनोपस इन अर्गों: आर्काइव्स’ शीर्षक के अंतर्गत पांच उपन्यासों की रचना कीः ‘रेफःकोलोनाइज्ड प्लेनेट 5 शिकस्त’ (1979), ‘द मेरेजेज बिट्वीन जोन्स थ्री, फोर एंड फाइव’ (1980), ‘द सिरियन इक्सपरिमेंट्स’ (1981), ‘द मेकिंग आफ रिप्रेजेंटेटिव फार प्लेनेट 8’ (1982) तथा ‘डाक्यूमेंट्स रिलेटिंग टु द सेंटिमेंटल एजेंट्स इन द वाल्येन इंपायर’ (1983)। ‘कैनोपस इन अर्गो’ का अर्थ है अर्गा तारामंडल में अगस्त्य नक्षत्र। यह श्रंखला बाह्य अंतरिक्ष में रची गई एक फंतासी है।

एक बार जब लेसिंग से पूछा गया कि उन्हें अपनी कौन-सी पुस्तकें सबसे महत्वपूर्ण लगती हैं, तो उनका जवाब था, “‘कैनोपस इन अर्गो’ श्रंखला की विज्ञान-कथाएं।” इस श्रंखला में परमाणु युद्ध के बाद एक विकसित सभ्यता के जबरन विकास के अनेक पहलुओं की कहानी कही गई है। इस श्रंखला पर सूफीवाद का भी प्रभाव है। श्रंखला की कृतियों को वे अनुभवातीत यथार्थ कहती हैं जिसे अंतरिक्ष युग की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया गया है। वे कहती हैं कि इनके माध्यम से उन्होंने अपनी एक नई संभाव्य दुनिया रची है। एक ऐसे समय की कल्पना की है जिसमें बृहद ब्रह्मांडीय सम्राज्यों का सरोकार केवल व्यक्ति तक ही नहीं बल्कि ग्रहों तक फैला हुआ है।

‘रेफः कोलोनाइज्ड प्लेनेट 5 शिकस्त’ में प्रतीक रूप में हमारी इसी पृथ्वी पर लाखों वर्षों के विकास-क्रम की कथा बुनी गई है। अनेक समस्याओं और तृतीय विश्व युद्ध की विभीषिका से उत्पन्न बेहद खतरनाक समय में हमें बचाने के लिए आकाशगंगा में बसी एक और सभ्यता का प्राणी आता है। लेकिन, संघर्ष होता है क्योंकि यह अवश्यम्भावी है।

‘द मैरेजेज बिट्वीन जोंस थ्री, फोर एंड फाइव’ की कथा एक ऐसे आदर्श ग्रह की पृष्ठभूमि में बुनी गई है जहां विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अचानक जननक्षमता का संकट पैदा हो गया है। इस संकट का समाधान एक ही है-सामाजिक तथा भौगोलिक बंधनों को तोड़ कर विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों के बीच वैवाहिक संबंध। लेसिंग मानव जाति के उज्जवल भविष्य के लिए इसकी विविधता और सहिष्णुता को अनिवार्य मानती हैं क्योंकि यही गुण हमें सशक्त बनाते हैं। हम इस कहानी में जाति के बंधनों में जकड़े  अपने समाज की छवि भी देख सकते हैं। ‘टाइम्स मैगजीन’ ने इस उपन्यास के बारे में लिखा- ‘अद्भुत….चुटकी भर में इस दुनिया का संक्षिप्त इतिहास, मानव की विना्यकारी प्रवृत्ति के विरोध का दस्तावेज, पृथ्वी के नैसर्गिक सौंदर्य का प्रेरक गीत और अनंत आकाश की आराधना…’ इस उपन्यास को गीति-नाट्य के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।

‘द सिरियन ऐक्सपरिमेंट्स’ में उपनिवेशवाद पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उच्च साम्राज्य के लोग अपने लाभ के लिए समाज की अल्प विकसित जातियों पर प्रयोग करते है जिनके परिणाम सदैव उनकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं होते। इस कृति में लेसिंग ने यह संकेत किया कि एक औजार के रूप में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का उपयोग करके कैसे मानव जाति की स्थिति सुधारी जा सकती है। इस उपन्यास को ‘बुकर पुरस्कार’ के लिए नामित किया गया। ‘द मेकिंग आफ द रिप्रेजेंटेटिव फार प्लेनेट 8’ में भी एक खुशहाल और अपराध मुक्त यूटोपियन ग्रह की कथा कहते-कहते लेखिका आसन्न हिमयुग की आपदा में मानव के जीवन संघर्ष का चित्रण करती हैं। इस कृति के आधार पर भी 1986 में गीति-नाट्य की रचना की गई। श्रंखला का अंतिम उपन्यास ‘द सेंटिमेंटल एजेंट्स इन द वाल्येन इंपायर’ में आकाशगंगा के किसी दूरस्थ भाग में सिरियाई एजेंट एक छोटे से साम्राज्य का अध्ययन कर रहे हैं ताकि उसे अपने प्रभाव क्षेत्र में ला सकें। लेकिन, इस अध्ययन से स्वयं उन्हीं की मानसिकता में परिवर्तन हो जाता है।

डोरिस लेसिंग के कई अन्य उपन्यासों में भी विज्ञान कथाओं के बीज हैं। नोबेल पुरस्कार चयन समिति ने उन्हें नारी अनुभवों की महाकाव्यात्मक व्याख्या करने वाली ऐसी लेखिका बताया जिन्होंने अपनी लेखनी से विभाजित सभ्यता का कई कोणों से चित्रण करके उसे हमारे सामने रख दिया। लेसिंग ने बीसवीं सदी के तमाम सरोकारों की पैनी पड़ताल की। उन्होंने लैंगिक भेदभाव, नस्लीय दूरी और समाज में परिवार तथा व्यक्ति की भूमिका की व्याख्या की। वैज्ञानिक तथा तकनीकी अहम भी उनकी कहानियों का अहम विषय रहा। उन्हें 1987 में आयोजित ‘वल्र्ड साइंस फिक्शन कन्वेंशन (वर्डकान) में ‘सम्मानित अतिथि लेखक’ के रूप में आमंत्रित किया गया जिसमें उनके व्याख्यान को काफी सराहा गया।

अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि ‘मेमोयर्स आफ अ सर्वाइवर’ मेरे लिए आत्मकथा लिखने का ही एक और प्रयास है। मतलब यह कि उनकी प्रतीकात्मक या रूपक कथाएं हमारी इसी दुनिया और समाज की भावी कहानियां कही जा सकती हैं।

 

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