आइए, सुनिए किस्सा-ए-कद

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हमें खबर ही नहीं और पता लगा है, हमारी लंबाई बढ़ रही है। यह कोई सुनी-सुनाई नहीं बल्कि, जांची-परखी खबर है। खुद वैज्ञानिकों का कहना है कि जनाब पिछले सौ-डेढ़ सौ साल में हमारा कद कम से कम चार इंच बढ़ चुका है। हद है, लोग तरसते हैं कद बढ़ाने के लिए और यहां चुपचाप, बिना कहे कद बढ़ गया।

मगर यकीन मानिए, वैज्ञानिक कहते हैं, कद बढ़ने की दो-तीन वजहें हैं। एक तो है माता-पिता से विरासत में मिले जीन। दूसरा, वातावरण और तीसरा खान-पान। जरा रूकिए, डॉक्टर एक और कारण बताते हैं- वह है हार्मोनों की हरकत। आइए, अब समझते हैं इन कारणों को। हर संतान को माता-पिता से जो जीन मिलते हैं, उनमें उसके पूरे शरीर की इबारत लिखी रहती है, कि वह आगे चल कर लंबा होगा या बौना, या मंझोला कद होगा। आंखें कैसी होंगी, बाल कैसे, रंग-रूप कैसा होगा- यह सभी कुछ जीन तय करते हैं। इसलिए अमूमन लंबे माता-पिता की संतान भी लंबी होती है। लेकिन, एक पेंच है इसमें। अगर माता-पिता के माता-पिता या उनके माता-पिता में से कोई बौना रहा होगा तो आगे चल कर किसी संतान का कद छोटा भी हो सकता है।

रही बात वातावरण और खानपान की, तो दुनिया में कुछ लोग वातावरण के कारण भी बौने रह जाते हैं। आपने पश्चिमी अफ्रीका के पिग्गी लोगों के बारे में पढ़ा होगा। वे जंगलों में ही रहते हैं और आज भी आखेट करते हैं, कंद-मूल खाते हैं। वैज्ञानिकों ने जब जांच की तो पता लगा कि पिग्गी लोगों का कद औसतन 4 फुट 11 इंच है, जबकि उन्हीं के पड़ोसी इलाकों के बेंटू आदिवासियों की औसत लंबाई 5 फुट 6 इंच है। लेकिन, ऐसा क्यों हुआ होगा? शोध से पता लगा, पिग्गी लोगों में छोटे कद के और बेंटू आदिवासियों में लंबे कद के जीन हैं।

अच्छा, क्या आप जानते हैं, दुनिया में अब तक सबसे लंबा आदमी और लंबी औरत कौन हुई है? अमेरिका का राबर्ट वाडलो सबसे लंबा आदमी था। उसकी लंबाई थी 8 फुट 11.1 इंच। उसका जन्म 1918 में हुआ था और उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसका कद भी बढ़ता गया। दस वर्ष का था तो लंबाई 6 फुट 5 इंच हो गई और वह 17.5 साइज का जूता पहनने लगा। अठारह वर्ष की उम्र में उसे दुनिया का सबसे लंबा आदमी घोषित कर दिया गया। तब उसकी लंबाई 8 फुट 3.5 इंच हो चुकी थी। वाडलो की मृत्यु 22 वर्ष की उम्र में हुई जब उसकी लंबाई 8 फुट 11.1 इंच और जूते का साइज 39 हो चुका था।

वाडलो के बाद लंबाई में दूसरे नंबर पर रहा अमेरिका का ही जॉन विलियम रोगन जिसका कद 8 फुट 9 इंच था। और, फिलहाल तुर्की में 1982 में जन्मे सुलतान कोसेन को दुनिया का सबसे लंबा आदमी होने के खिताब से नवाजा गया है। उसकी लंबाई 8 फुट 2.82 इंच है।

जहां तक महिलाओं की बात है तो चीन की जेंग जिनलियान दुनिया में अब तक की सबसे लंबी महिला हुई है उसकी लंबाई 8 फुट 1.34 इंच थी। दूसरा स्थान चीन की ही 7 फुट 8 इंच की याओ डेफेन का रहा है। अमेरिका की सेंडी एलन की लंबाई 7 फुट 7.25 इंच थी।

यह तो रही बड़े कद की बात। लेकिन जानते हैं, फिलहाल दुनिया में सबसे छोटे कद के खिताब से किसे नवाजा गया है? नेपाल के चंद बहादुर डांगी को! 21.5 इंच लंबे डांगी ने बौनेपन के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। वैसे 2012 तक यह खिताब दिल्ली के 1 फुट 10.5 इंच लंबे गुल मोहम्मद के नाम था। यों, अमेरिका में पैदा हुए चाल्र्स शेरवुड स्ट्रेटन ने बौनों की दुनिया में बड़ा नाम कमाया। 3.25 फुट का चाल्र्स स्ट्रेटन जनरल टॉम थंब के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने 2 फुट 66 इंच की लावीनिया वारेन से विवाह रचाया। तब नव विवाहित दम्पति को राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने ह्वाइट हाउस में दावत दी थी। वे दोनों दुनिया में सर्कस के सबसे नाटे कलाकार थे।

दुनिया में सबसे छोटे कद की महिलाओं की बात करें तो अब तक यह रिकार्ड नीदरलैंड की 24 इंच की पोलीन मस्टर्स का है। 1864 में मैक्सिको में जन्मे लूसिया ज़राटे की लंबाई भी 24 इंच थी और वज़न था केवल 2.1 किलोग्राम। वर्तमान में, नागपुर में 1993 में जन्मी हमारे देश की ज्योति आमगे विश्व की सबसे बौनी महिला है। उसकी लंबाई 2 फुट 1 इंच है।

अच्छा बताइए, दुनिया के किस देश के वयस्क लोगों का कद सबसे लंबा है? नहीं पता? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें, औसतन सबसे लंबा कद नीदरलैंड्स (6.03 फुट), मोंटेनेग्रो (6.01 फुट), डेनमार्क (5.99 फुट), नार्वे (5.98 फुट) और सर्बिया (5.97 फुट) के वयस्कों का पाया गया है। सबसे छोटे कद का रिकार्ड इन देशों के नाम है: बोलिविया (4 फुट 11.5 इंच), इंडोनेशिया (4 फुट 11.75 इंच), फिलिपींस (5 फुट 1.5 इंच), श्रीलंका (5 फुट 1.5 इंच) और पेरू (5 फुट 2 इंच)।

पुरूषों और महिलाओं की औसतन लंबाई के हिसाब से देखें तो दुनिया में डच पुरूष (6 फुट) सबसे लंबे और लाटविया (5.7 फुट) की महिलाएं सबसे लंबी मानी गई हैं। अफ्रीका के मसाई औसतन 6.3 फुट और टुट्सी तथा दिन्का कबीलों के आदमी 5.11 फुट तक लंबे होते हैं।

चलिए, इसी बात पर अपने पुरखों को याद करते हैं। उनका कद कितना रहा होगा? वैज्ञानिकों ने उनका भी पता लगाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि तीस-चालीस लाख साल पहले हमारे पुरखे ऑस्ट्रालोपिथेकस का कद तकरीबन 5 फुट रहा होगा और उनकी महिलाएं करीब 4.3 फुट की रही होंगी। हां, आखेट करने और भागने-दौड़ने के लिए चुस्ती-फुर्ती उनमें खूब रही होगी। करीब 30,000 वर्ष से 2 लाख वर्ष के बीच यूरोप और मध्य एशिया के नियंडरथल मानव शायद 5.5 फुट लंबे और औरतें 5.2 फुट लंबी रही होंगी। 10,000 से 40,000 साल पहले यूरोप और मध्य पूर्व में कद्दावर क्रोमैगनान मानव रहते थे। उनकी लंबाई करीब 5.5 फुट से 5.7 फुट तक रही होगी। शोध कार्य से पता लगा है कि करीब 20,000 साल पहले आधुनिक मानव और नियंडरथल मानव साथ रहते थे।

पप्पू के साथ लेखक देवेंद्र मेवाड़ी 111जहां तक हमारे देश की बात है, वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले सौ-डेढ़ सौ वर्षों में हमारा कद कुछ बढ़ गया है। अब वयस्कों की औसत लंबाई 5 फुट 4.9 इंच और महिलाओं की 5 फुट है। पिछले सौ-डेढ़ सौ वर्षों में महिलाओं की लंबाई करीब 4.9 सेमी. और पुरूषों की केवल 2.9 सेमी. बढ़ी है। 1914 में वयस्क पुरूषों की लंबाई औसतन 5.3 फुट और महिलाओं की औसतन लंबाई 4.10 फुट थी। इस रहस्य का खुलासा इम्पीरियल कालेज, लंदन के प्रोफेसर माजिद इज़ाती ने लंबे अध्ययन के बाद किया है। उनका कहना है, बांग्लादेश और श्रीलंका में इसी अवधि में महिलाओं की लंबाई 9.3 सेमी. बढ़ी।

प्रोफेसर इज़ाती और दुनिया के दूसरे वैज्ञानिकों का कहना है कि खान-पान से कद का सीधा रिश्ता है। अगर बचपन में अच्छा और भरपेट भोजन मिल जाए तो समझिए शरीर की बढ़वार भी अच्छी होगी और कद उतना बढ़ जाएगा जितना आपके जीनों ने तय किया है। इसी तरह अच्छी तंदुरुस्ती भी अच्छे कद के लिए जरूरी है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान में लोगों को आहार में भरपूर मछली खाने को मिली जिसकी प्रोटीन के कारण उनका कद औसतन 3 इंच बढ़ गया। नीदरलैंड्स और डेनमार्क आदि समृद्ध देशों में भी कद बढ़ने का मुख्य कारण बेहतर तथा पौष्टिक भोजन है।

और हां, अच्छी कद-काठी के लिए हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोनों का भी बड़ा हाथ है। हमारे सिर के भीतर पिट्यूरी ग्रंथि में वृद्धि हॉर्मोन बनता है जो शरीर को सही ढंग से बढ़ने का संदेश देता है। वह ज्यादा बनने लगे तो कोई राबर्ट वाडलो बन सकता है और अगर कम बने तो बौना रह जाता है।

लब्बे-लुबाब यह कि पोषक आहार खाइए, तंदुरुस्त रहिए और अपनी कद-काठी के लिए पुरखों का शुक्रिया अदा कीजिए। भला कद से क्या फर्क पड़ता है, इंसान का सोच बड़ा होना चाहिए। है ना?
देवेंद्र मेवाड़ी

 

 

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