मुस्कराया है डेजर्ट रोज

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बालकनी में बेटी की बगिया का डेज़र्ट रोज पौने दो साल बाद आज पहली बार मुस्कराया है। उस पर बहार आ गई है। इस बहार का जश्न मना रहे हैं हम।

कौन डिज़र्ट रोज़? आप चाहें तो इसे इंपाला लिली भी कह सकते हैं या फिर सेबी स्टार, माक अज़ेलिया या कुडू नाम से भी पुकार सकते हैं। वो, शैक्सपियर कह गए हैं ना कि नाम में क्या रखा है- रोज़ यानी गुलाब को किसी भी नाम से पुकारिए, रहेगा वह गुलाब ही। इसी तरह इस डेज़र्ट रोज़ को भी चाहे किसी नाम से पुकारिए, रहेगा यह डेज़र्ट रोज़ ही।

desert_rose_flower_by_mad_hawaiian-d3kw7g1याद है, हमारे घर यह 1 अगस्त 2015 को अपने दोस्त के साथ आया था। उस दिन मुझे मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए दिल्ली राज्य विज्ञान शिक्षक फोरम की ओर से नई दिल्ली के महाराजा अग्रसेन माडल स्कूल, पीतमपुरा में आयोजित समारोह में आमंत्रित किया गया था। वहां स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती प्रतिभा कोहली ने मुझे डेज़र्ट रोज़ के दो पौधे भेंट किए। स्कूल के माली लछमन ने वहां स्कूल में सैकड़ों पौधों से मेरी भेंट कराई। उसने कई रंगों के फूलों वाले डेज़र्ट रोज़ भी दिखाए। उन पर लछमन ने ग्राफ्टिंग की विधि से कलमें लगाई थीं। कलमों का ही कमाल था कि डेज़र्ट रोज़ के एक ही पौधे में अलग-अलग शाखों पर लाल, गुलाबी और सफेद फूल खिले थे।

डेज़र्ट रोज़ का उनका संग्रह देख कर मैं चकित रह गया था। साथ ही पहली ही नज़र में उन पौधों पर मुग्ध भी हो गया था। वे बेडौल या गोल-मटोल शरीर वाले पौधे देखते ही अपनी बोंसाई जैसी कद-काठी से बहुत ध्यान आकर्षित कर रहे थे। जितनी देर उनकी संगत में रहा, बहुत अच्छा लगा।

वे दोनों डेज़र्ट रोज़ मेरे साथ गाड़ी में बैठ कर घर चले आए। दो-एक दिन मेरे छोटे से अध्ययन कक्ष में रहे। फिर बालकनी की बगिया में आ गए। मैंने इनके बारे में पढ़ना शुरू किया। पता लगा, घर अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप भले ही हो, लेकिन आज ये दुनिया के तमाम देशों में फैल चुके हैं। इसकी वजह है इनकी प्यारी-सी शक्ल-सूरत। घरेलू शोभाकारी पौधे के रूप में यह लोगों का पसंदीदा पौधा है।

sok8वनस्पति विज्ञान की भाषा में यह सदाबहार पौधा एपोसाएनेसी परिवार का सदस्य है। हां, ठंड अधिक पड़ने पर पत्तियां झड़ सकती हैं। जमीन में उगने पर डेज़र्ट रोज़ के पौधे तीन मीटर तक भी ऊंचे हो सकते हैं मगर गमलों में यह बखूबी बोंसाई बन कर जी सकता है। इनकी सुंदरता इनके तुरही जैसे लाल, गुलाबी और सफेद फूलों से दुगुनी हो जाती है। अब तो इनके कई दूसरे रंगों के फूल भी वनस्पति विज्ञानियों ने विकसित कर लिए हैं। इनके फूलों में पांच पंखुड़ियां होती हैं। साथ ही कंपोजिट फूलों वाली किस्में भी तैयार कर ली गई हैं जिनमें कई पंखुड़ियां होती है।

सूखे, रेगिस्तानी इलाकों का निवासी पौधा है, इसलिए इसे धूप भरपूर चाहिए मगर पानी बहुत कम। अगर पानी ज्यादा पड़ गया तो पौधा गल जाता है। यह सावधानी हम बरतते आ रहे हैं। लेकिन, पहले यह पता नहीं था कि सर्दी में इसे कम से कम 1.0 डिग्री सेल्सियस तापमान तो मिलना ही चाहिए। इसलिए सर्दियों में दिन भर धूप तापने के बाद इसे घर भीतर ले आना चाहिए ताकि ठंड से बच सके। अब आगे हम इस बात का ध्यान रखेंगे।

vintage-USA-Franciscan-pottery-Desert-Rose-covered-dish-round-casserole-Laurel-Leaf-Farm-item-no-m2896-1इस सुंदर पौधे को रायल हार्टिकल्चरल सोसाइटी, लंदन ने गार्डन मेरिट अवार्ड से नवाज़ा है। और, कई देशों ने इसकी तस्वीर अपने डाक टिकटों में भी छापी है। इसकी खूबसूरती की बदौलत सजावटी चीजों पर इसके चित्र उकेरे गए हैं।

इतना सुंदर पौधा है तो इसे नुकसान पहुंचाने वाले जीव-जंतु भी क्या कम होंगे? प्रकृति ने बचाव के लिए गुलाब को तो कांटे बख्श दिए। सोचा होगा, इसे क्या दूं? यह अपना बचाव कैसे करेगा? तो, उसने इसके पोर-पोर में ज़हर भर दिया। इसलिए सावधान रहना चाहिए कि इसके तने या पत्तियों का रस शरीर में कतई न जाए। इसकी पत्तियां कोई चबा न बैठे।

kenya-circa-1983-a-stamp-printed-in-kenya-shows-a-flower-adenium-obesum-hee1b7अफ्रीका के कबीलों को इसके इस रहस्य का पता बहुत पहले लग गया था। उन्होंने इसके रस में अपने तीर डुबाना शुरू कर दिया। उन जहर बुझे तीरों से वे जंगली जानवरों का शिकार करने लगे। इसलिए बेहतर होगा कि डिज़र्ट रोज़ की सेवा-सुश्रुषा दस्ताने पहन कर करें और इसकी सुंदरता को जरा दूर से ही निहारें।

फिलहाल, हमारे साथ तो ये बड़े मजे से रह रहे हैं, शायद तभी खिल कर मुस्कराने लगे हैं।

फोटो: गूगल साभार।

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