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Vigyan Diary, Page 2

Meri Vigyan Diary

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 चौरास में प्रेरणा

बचपन में ही किस तरह बच्चों को विज्ञान की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जा सकती है, यह प्रयोग ‘इंस्पायर’ …

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फिर आया बड़ा बसंता

  बड़ा बसंता आज फिर आया। सामने ऐलेस्टोनिया के पेड़ की हरीभरी डाली पर बैठा बोलने लगा- कुटरू…कुटरू…कुटरू…कुटरू! बसंता आसपास के पेड़ों …

निराला है मशरूम

पहले तक मशरूम मेरे लिए केवल कुकुरमुत्ता था जिसे पहाड़ के मेरे गांव में च्यूं कहते थे। वहां जंगलों में बरसात के …

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डाक्टर कैथ

  पांच सितंबर को फेसबुक मित्र आशीष श्रीवास्तव की वाल पर कैथ और कैथ की चटनी का चित्र देखा तो मुझे मंदसौर …

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कहां गया रामदाना

अब तो भूले-बिसरे ही याद आता है हमें रामदाना। उपवास के लिए लोग इसके लड्डू और पट्टी खोजते हैं। पहले इसकी खेती …

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सिसुणा को साग

असल में लोकोक्ति है- “मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग।” बचपन में सुना ही सुना था। सिसुणा का साग बनता बहुत …

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मंडुवा की रोटी भली

  कल मंडुवा की रोटी खाई। एक लेसुवा भी खाया। बहुत आनंद आया। दिनों-महीनों बाद मंडुवा की रोटी मिलने पर पाई हुई …

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अनोखी है हमारी सरजमीं

स्याह रातों में कभी तारों भरा आसमान देखा है आपने? अगर हां तो आसमान में आरपार फैली कहकशां और उसके चमकते बेशुमार …

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दास्तान-ए-गौरेया

आज (20 मार्च) दास्तानगोई का दिन भी है और नन्ही गौरेया का दिन भी। हमारे आसपास सदा घुंघरुओं की खनक-सी आवाज में …

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लौट आई हैं बुलबुलें

मौसमे-बहार की खबर पाकर हमारे शहर में भी लौट कर आने लगी हैं बुलबुलें। इन दिनों अलस्सुबह सन्नाटे में एक अकेली बुलबुल …