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Vigyan Diary, Page 2

Meri Vigyan Diary

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कहां गया रामदाना

अब तो भूले-बिसरे ही याद आता है हमें रामदाना। उपवास के लिए लोग इसके लड्डू और पट्टी खोजते हैं। पहले इसकी खेती …

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सिसुणा को साग

असल में लोकोक्ति है- “मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग।” बचपन में सुना ही सुना था। सिसुणा का साग बनता बहुत …

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मंडुवा की रोटी भली

  कल मंडुवा की रोटी खाई। एक लेसुवा भी खाया। बहुत आनंद आया। दिनों-महीनों बाद मंडुवा की रोटी मिलने पर पाई हुई …

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अनोखी है हमारी सरजमीं

स्याह रातों में कभी तारों भरा आसमान देखा है आपने? अगर हां तो आसमान में आरपार फैली कहकशां और उसके चमकते बेशुमार …

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दास्तान-ए-गौरेया

आज (20 मार्च) दास्तानगोई का दिन भी है और नन्ही गौरेया का दिन भी। हमारे आसपास सदा घुंघरुओं की खनक-सी आवाज में …

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लौट आई हैं बुलबुलें

मौसमे-बहार की खबर पाकर हमारे शहर में भी लौट कर आने लगी हैं बुलबुलें। इन दिनों अलस्सुबह सन्नाटे में एक अकेली बुलबुल …

विज्ञान परिक्रमा 2015

विज्ञान परिक्रमा 2015

विज्ञान की अनेक नई विस्मयकारी खोजों से मानव जीवन तथा समाज पर विज्ञान की गहरी छाप छोड़ कर वर्ष 2015 विदा हो …

प्रेमधाम के प्यारे बच्चे

हाल ही में प्रेमधाम आश्रम, नजफगढ़ दिल्ली में हेनी-पेनी लाइब्रेरी से जुड़े बच्चों को कहानियां सुनाने का मौका मिला। यह मौका मिला …

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पहरे पर टैडी

बालकनी में बिटिया की बगिया का नौ-बजिया खतरे में है। और, खतरा भी किससे? सीधे-सादे कबूतर से! पहले पता नहीं था कि …