ओ, मेरी यादों का पहाड़-2

समाचार पत्र-पत्रिकाएं और पाठक तुम्हारे बारे में समय-समय पर क्या-क्या लिखते रहे हैं, बताऊं तुम्हें? ‘ओं’ ‘तो सुनो’ ‘नवभारत टाइम्स’, मुंबई (6 अगस्त 2017) में तुम्हारी समीक्षा करते हुए जाने-माने कवि-कथाकार और पत्रकार हरिमृदुल ने लिखा, “बचपन की स्मृतियां संजो कर मेवाड़ी जी ने संस्मरणात्मक कथा साहित्य को ऐसी ऊंचाई …

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आबिद मेरे हीरो

दादा का पानी के जहाजों का करोबार डूब जाए और अचानक पूरा परिवार फुटपाथ पर आ जाए। ताप्ती नदी की भीषण बाढ़ …

बाबा अरुण कौल और धूमकेतु

    मार्च माह का अंतिम सप्ताह था। वर्ष 1997। उन दिनों आकाश में हेल-बॉप धूमकेतु आया हुआ था जिसे लोग कोरी …

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केवल हम ही नहीं हंसते

हंसते-मुस्कराते मन में कई बार ख्याल आता है कि क्या इस धरती पर केवल हम ही हंसते हैं? या, जानवर भी हंसते …

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पहाड़ में वसंत

दूर पहाड़ों में आ गया होगा वसंत। शायद इसीलिए कई दिनों से मन बैचेन है। इन दिनों महान प्रकृति विज्ञानी चार्ल्स डार्विन …

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कैसी हो किसान भारती

  याद करता रहता हूं मैं तुम्हें प्रिय ‘किसान भारती’ और दुआ भी मांगता करता हूं कि तुम्हें खूब लंबी उम्र मिले। …

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पहाड़ में छह दिन

अगर कोई जुझारू लड़की घर में तीन-तीन दारुण त्रासदियां सह कर भी दो नन्हे बच्चों का हाथ पकड़ कर, पति भवानी शंकर …

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ऐ सरज़मीं तुझे सलाम 

स्याह रातों में कभी तारों भरा आसमान देखा है आपने? अगर हां तो आसमान में आरपार फैली कहकशां और उसके चमकते बेशुमार …