ऐसे थे भीष्म जी

  नैनीताल से एम.एस.सी. करने के बाद दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में पहली नौकरी लगी तो नौकरी की खुशी के साथ-साथ मन यह सोच-सोच कर खुश होता था कि अब हिंदी के बड़े साहित्यकारों को देखने और सुनने का मौका मिलेगा। मैं कहानियां लिखने लगा था और मेरी कुछ कहानियां …

100_830811

सिसुणा को साग

असल में लोकोक्ति है- “मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग।” बचपन में सुना ही सुना था। सिसुणा का साग बनता बहुत …

मंडुवा की रोटी भली

कल मंडुवा की रोटी खाई। एक लेसुवा भी खाया। बहुत आनंद आया। दिनों-महीनों बाद मंडुवा की रोटी मिलने पर पाई हुई जैसी …

13579931_f10153858969697525_885062600_111111o

हरियाली में किताबें

बाल साहित्य में विज्ञान की बात करके जून के आखिरी दिन देहरादून से दिल्ली लौटा ही था कि अलसुबह रेलवे स्टेशन जाकर …

13015154_10205948307898339_7638101663022060172_n

अनोखी है हमारी सरजमीं

स्याह रातों में कभी तारों भरा आसमान देखा है आपने? अगर हां तो आसमान में आरपार फैली कहकशां और उसके चमकते बेशुमार …

12246911_10205667361394852_2256973653039738652_n

दास्तान-ए-गौरेया

आज (20 मार्च) दास्तानगोई का दिन भी है और नन्ही गौरेया का दिन भी। हमारे आसपास सदा घुंघरुओं की खनक-सी आवाज में …

12592578_10205825278582683_4913250791725764730_n

लौट आई हैं बुलबुलें

मौसमे-बहार की खबर पाकर हमारे शहर में भी लौट कर आने लगी हैं बुलबुलें। इन दिनों अलस्सुबह सन्नाटे में एक अकेली बुलबुल …

अलौकिक प्रेम

    ‘विज्ञान कथा? आपका मतलब है साइंस फिक्शन?’ ‘हां’ कहते ही उन्हें  दूसरी ओर से हंसने की आवाज सुनाई दी। ‘साइंस …