निराला है मशरूम

पहले तक मशरूम मेरे लिए केवल कुकुरमुत्ता था जिसे पहाड़ के मेरे गांव में च्यूं कहते थे। वहां जंगलों में बरसात के मौसम में उगे कुकुरमुत्तों की सुंदर छतरियां दिखाई देती थीं। ऐसी सबसे बड़ी सफेद छतरी मैंने तब बनौलिया के जंगल में चीड़ के पेड़ों के बीच देखी थी। …

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डाक्टर कैथ

  पांच सितंबर को फेसबुक मित्र आशीष श्रीवास्तव की वाल पर कैथ और कैथ की चटनी का चित्र देखा तो मुझे मंदसौर …

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कहां गया रामदाना

अब तो भूले-बिसरे ही याद आता है हमें रामदाना। उपवास के लिए लोग इसके लड्डू और पट्टी खोजते हैं। पहले इसकी खेती …

ऐसे थे भीष्म जी

  नैनीताल से एम.एस.सी. करने के बाद दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में पहली नौकरी लगी तो नौकरी की खुशी के साथ-साथ मन …

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सिसुणा को साग

असल में लोकोक्ति है- “मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग।” बचपन में सुना ही सुना था। सिसुणा का साग बनता बहुत …

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मंडुवा की रोटी भली

  कल मंडुवा की रोटी खाई। एक लेसुवा भी खाया। बहुत आनंद आया। दिनों-महीनों बाद मंडुवा की रोटी मिलने पर पाई हुई …

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हरियाली में किताबें

बाल साहित्य में विज्ञान की बात करके जून के आखिरी दिन देहरादून से दिल्ली लौटा ही था कि अलसुबह रेलवे स्टेशन जाकर …

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अनोखी है हमारी सरजमीं

स्याह रातों में कभी तारों भरा आसमान देखा है आपने? अगर हां तो आसमान में आरपार फैली कहकशां और उसके चमकते बेशुमार …