Neelakurinji (2)

लो फिर बहार आई

  दक्षिण भारत में बारह वर्ष बाद फिर बहार के दिन आ गए हैं। पश्चिमी घाट की ऊंची पहाड़ियों पर प्रकृति अपनी कूंची से नीला रंग भरने लगी है। रंगो-बू की यह बेशकीमती बहार वहां खिल रहे नीला कुरिंजी के फूलों से आ रही है। जानकार लोग बता रहे हैं …

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2050 की दुनिया

  इक्कीसवीं सदी के मध्यकाल में खड़ा हूं। चकित होकर देख रहा हूं चारों तरफ कि कितनी बदल गई है यह दुनिया! …

लियोनिंड उल्कावृष्टि

वह धातु इस धरती की नहीं

यह खबर पढ़ कर मैं हैरान रह गया था कि जर्मनी के वैज्ञानिक डा. एल्मर बुकनर और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों ने धातु …

पहरे पर टैडी

बालकनी में बिटिया की बगिया का नौ-बजिया खतरे में है। और, खतरा भी किससे? सीधे-सादे कबूतर से! पहले पता नहीं था कि …

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आओ गौरेया, आओ

12 मार्च 2010 घर कब बसाएंगी गौरेया मेरी आगे की बालकनी में रोज सुबह गौरेयां चहचहाती हैं। सुना है इनका चहचहाना शुभ …

रेन ट्री

ये ‘रेन ट्री’ हैं। इन्हें हिंदी, मराठी, बांगला भाषा में विलायती सिरिस कहा जाता है। मैंने रेन ट्री के खूबसूरत पेड़ कुछ …

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निराला है मशरूम

पहले तक मशरूम मेरे लिए केवल कुकुरमुत्ता था जिसे पहाड़ के मेरे गांव में च्यूं कहते थे। वहां जंगलों में बरसात के …

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जाओ मल्या फिर आना

ऋतु वसंत आ गई है। प्यूली के वसंती फूल खिल कर उसके आने की खबर दे रहे हैं। कहीं-कहीं सुर्ख बुरांश भी …

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चहकने लगी हैं बुलबुलें

    मौसमे-बहार की खबर पाकर लौट आई हैं बुलबुलें। इन दिनों अलस्सुबह सन्नाटे में दो-एक बुलबुलों की चहक से नींद खुल …