DSCN1010

कालयात्रा में भीमबेटका (यात्रा संस्मरण)

  यह मन भी कालयात्रा पर कहां-कहां भटकता रहता है! धरती से आसमान तक। आज से लेकर अतीत की दुनिया और भविष्य में बेरोक-टोक जब चाहे आता-जाता रहता है। लेकिन, वह अनुभव अनोखा और अविस्मरणीय बन जाता है जब मन के साथ शरीर भी इस में शरीक हो जाता है। …

21930491

फिर आया बड़ा बसंता

  बड़ा बसंता आज फिर आया। सामने ऐलेस्टोनिया के पेड़ की हरीभरी डाली पर बैठा बोलने लगा- कुटरू…कुटरू…कुटरू…कुटरू! बसंता आसपास के पेड़ों …

निराला है मशरूम

पहले तक मशरूम मेरे लिए केवल कुकुरमुत्ता था जिसे पहाड़ के मेरे गांव में च्यूं कहते थे। वहां जंगलों में बरसात के …

dscn16021122

डाक्टर कैथ

  पांच सितंबर को फेसबुक मित्र आशीष श्रीवास्तव की वाल पर कैथ और कैथ की चटनी का चित्र देखा तो मुझे मंदसौर …

398px-3836_-_amaranthus_caudatus_zieramaranth

कहां गया रामदाना

अब तो भूले-बिसरे ही याद आता है हमें रामदाना। उपवास के लिए लोग इसके लड्डू और पट्टी खोजते हैं। पहले इसकी खेती …

ऐसे थे भीष्म जी

  नैनीताल से एम.एस.सी. करने के बाद दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में पहली नौकरी लगी तो नौकरी की खुशी के साथ-साथ मन …

100_830811

सिसुणा को साग

असल में लोकोक्ति है- “मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग।” बचपन में सुना ही सुना था। सिसुणा का साग बनता बहुत …

4(69)

मंडुवा की रोटी भली

  कल मंडुवा की रोटी खाई। एक लेसुवा भी खाया। बहुत आनंद आया। दिनों-महीनों बाद मंडुवा की रोटी मिलने पर पाई हुई …